पौड़ी में मानसून पूर्व मॉक ड्रिल, थलीसैंण में बादल फटने व भूस्खलन पर राहत-बचाव अभ्यास

पौड़ी में मानसून पूर्व मॉक ड्रिल, थलीसैंण में बादल फटने व भूस्खलन पर राहत-बचाव अभ्यास

स्थान : पौड़ी गढ़वाल
ब्यूरो रिपोर्ट

मानसून से पूर्व तैयारियों को परखने के उद्देश्य से गुरुवार को पौड़ी के थलीसैंण क्षेत्र में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रशासन ने आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों का परीक्षण किया।

मॉक ड्रिल के दौरान थलीसैंण में बादल फटने और भूस्खलन की काल्पनिक सूचना पर एसडीएम कृष्णा त्रिपाठी के नेतृत्व में एसडीआरएफ, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। अभ्यास में स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

परिदृश्य के अनुसार बादल फटने की घटना में 25 लोगों के फंसे होने और भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु तथा तीन लोग गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति तैयार की गई। घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल पौड़ी भेजने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया।

एसडीएम कृष्णा त्रिपाठी ने बताया कि मॉक ड्रिल सुबह करीब 9 बजकर 20 मिनट पर शुरू की गई थी। इसमें सभी विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और राहत-बचाव कार्यों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप जांच की गई।

इसी दौरान कंट्रोल रूम से मिली सूचना के अनुसार सतपुली-गुमखाल मार्ग पर भूस्खलन से सड़क अवरुद्ध होने और 20 से 30 लोगों के फंसे होने की स्थिति पर भी राहत दलों ने तुरंत कार्रवाई की। एक घायल को हंस फाउंडेशन अस्पताल सतपुली भेजा गया।

इसके बाद थलीसैंण क्षेत्र में बादल फटने की दूसरी काल्पनिक घटना में 25 लोगों के प्रभावित होने, दो लोगों की मृत्यु तथा तीन गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर करने का अभ्यास किया गया। साथ ही अन्य प्रभावितों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी अपनाई गई।

जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभागीय समन्वय को मजबूत करना और कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों ने बेहतर तालमेल के साथ राहत एवं बचाव कार्यों का सफल संचालन किया। इस मौके पर एसएसपी सर्वेश पंवार, सीडीओ अशोक जोशी, एडीएम एफआर चौहान, सीएमओ डॉ. शिवमोहन शुक्ला सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।