वैली ऑफ फ्लावर्स में खिला हिमालयन ब्लू पॉपी, प्रकृति प्रेमियों में बढ़ा उत्साह

वैली ऑफ फ्लावर्स में खिला हिमालयन ब्लू पॉपी, प्रकृति प्रेमियों में बढ़ा उत्साह

लोकेशन – ज्योतिर्मठ (चमोली)
ब्यूरो रिपोर्ट

विश्व धरोहर वैली ऑफ फ्लावर्स में इस वर्ष प्रकृति प्रेमियों को अल्पाइन हिमालयी पुष्पों की रानी कही जाने वाली हिमालयन ब्लू पॉपी के दीदार समय से पहले ही होने लगे हैं। दुर्लभ और आकर्षक नीले रंग का यह फूल इन दिनों घाटी में अपनी रंगत बिखेर रहा है, जिससे पूरी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर गई है।

चमोली जनपद की उच्च हिमालयी भ्यूंडार घाटी में स्थित फूलों की घाटी देश-दुनिया के प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहां सैकड़ों दुर्लभ अल्पाइन पुष्प प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे वनस्पति प्रेमियों का स्वर्ग भी कहा जाता है।

माउंटेन गाइड Jaideep Bhatt ने बताया कि घाटी में हिमालयन ब्लू पॉपी पूरी तरह खिल चुकी है। इसके अलावा पोटेंटिल्ला, प्रिमूला, एनीमोना, जिरेनियम, मार्श मैरीगोल्ड, फॉरगेट-मी-नॉट, स्नेक लिली और अन्य कई प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल भी घाटी के विभिन्न हिस्सों में दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में करीब 50 से अधिक प्रजातियों के पुष्प पर्यटकों का स्वागत कर रहे हैं।

जापानी पर्यटकों की पहली पसंद

हिमालयन ब्लू पॉपी, जिसका वानस्पतिक नाम Meconopsis betonicifolia है, दुनिया के सबसे आकर्षक पर्वतीय फूलों में गिना जाता है। विशेष रूप से जापान, थाईलैंड और सिंगापुर से आने वाले पर्यटक इस फूल को देखने के लिए बड़ी संख्या में फूलों की घाटी पहुंचते हैं। इसकी नीली रंगत और दुर्लभता इसे अन्य पुष्पों से अलग बनाती है।

रोचक है ब्लू पॉपी की कहानी

बताया जाता है कि वर्ष 1986 तक फूलों की घाटी में ब्लू पॉपी नहीं दिखाई देती थी। उसी दौरान जापान के शोध छात्र Cho Bakambe यहां फूलों पर अध्ययन करने आए थे। माना जाता है कि उन्होंने शोध के दौरान ब्लू पॉपी के बीज घाटी में बिखेरे थे। करीब तीन वर्ष बाद जब वे दोबारा यहां पहुंचे तो घाटी में ब्लू पॉपी की सुंदर क्यारियां दिखाई दीं। तब से यह दुर्लभ फूल घाटी की पहचान बन गया है।

जैव विविधता का खजाना है फूलों की घाटी

समुद्र तल से लगभग 12,500 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली Valley of Flowers National Park जैव विविधता का अनमोल खजाना है। यहां 500 से अधिक प्रजातियों के फूल, दुर्लभ औषधीय पौधे, वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं।

इस घाटी को वर्ष 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था और वर्ष 2005 में UNESCO ने इसे विश्व प्राकृतिक धरोहर का दर्जा प्रदान किया।

पार्क की रेंज अधिकारी Chetna Kandpal के अनुसार इस वर्ष सीजन के शुरुआती तीन सप्ताह में पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही है। हिमालयन ब्लू पॉपी के खिलने से घाटी की सुंदरता और आकर्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

जुलाई और अगस्त के दौरान फूलों की घाटी अपने चरम सौंदर्य पर होती है। ऐसे में हिमालयन ब्लू पॉपी के समय से पहले खिलने की खबर प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए किसी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है।