मसूरी में मजदूर दिवस पर विशाल रैली, सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

मसूरी में मजदूर दिवस पर विशाल रैली, सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर पहाड़ों की रानी मसूरी में मजदूर संगठनों ने विशाल रैली निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अनुपम चौक लंढौर से गांधी चौक तक निकाली गई इस रैली में सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।

इस प्रदर्शन में रिक्शा चालक, होटल कर्मी, निर्माण श्रमिक, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और भोजन माताएं शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

मजदूर नेताओं ने कहा कि श्रमिक वर्ग खुद को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के साथ-साथ श्रमिक अधिकारों की अनदेखी ने मजदूरों की स्थिति को और कठिन बना दिया है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

वक्ताओं ने कहा कि 1886 के ऐतिहासिक मई दिवस आंदोलन की भावना भी उतनी ही प्रासंगिक है और मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन में जीवन यापन करना कठिन हो रहा है।

मजदूर संगठनों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने और महंगाई भत्ते पर लगी रोक हटाने की मांग की। साथ ही “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन” की श्रम नीति लागू करने की भी जोरदार मांग उठाई गई।

सभा में आरोप लगाया गया कि मसूरी के कई होटल संचालक श्रमिकों से 12-12 घंटे काम ले रहे हैं, लेकिन उन्हें पीएफ, ईएसआई, साप्ताहिक अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रहीं। इस पर श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि शोषण नहीं रुका तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और भोजन माताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और उन्हें राज्य कर्मचारियों के समान वेतन व सुविधाएं देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही रिक्शा चालकों के पुनर्वास और नगर पालिका की योजनाओं में शामिल करने की मांग की गई।