

स्थान : चमोली (हेमकुंड)
ब्यूरो रिपोर्ट

उच्च हिमालयी लोकपाल घाटी में सप्तश्रृंग पर्वतों के मध्य स्थित पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने हैं। यात्रा की तैयारियों के तहत हेमकुंड साहिब मार्ग पर जमी बर्फ को हटाने का कार्य तेजी से जारी है।


यात्रा मार्ग को सुचारु करने के लिए भारतीय सेना के जवान और गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सेवादार संयुक्त रूप से कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। बर्फबारी के कारण मार्ग कई स्थानों पर पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था।


गुरुद्वारा ट्रस्ट के सीनियर मैनेजर सरदार सेवा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 16 अप्रैल को गोविंदघाट गुरुद्वारे से सेना के 22 जवानों की एक विशेष टुकड़ी रवाना की गई थी। यह टीम गुरु गोविंद धाम और हेमकुंड साहिब मार्ग पर बर्फ हटाने के कार्य में लगातार जुटी हुई है।


उन्होंने बताया कि जवानों ने अब तक छोटा अटलाकोटी से बड़ा अटलाकोटी तक लगभग 3 किलोमीटर लंबे हिस्से से बर्फ हटाकर मार्ग को आंशिक रूप से साफ कर दिया है। यह कार्य अत्यंत कठिन परिस्थितियों में किया जा रहा है, जहां भारी बर्फ जमा है।

फिलहाल बड़ा अटलाकोटी के आगे से हेमकुंड साहिब धाम तक लगभग 3 किलोमीटर का मार्ग अभी भी बर्फ से ढका हुआ है। यहां पर 3 से 5 फीट तक मोटी बर्फ की परत जमी हुई है, जिससे काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।


सेवा सिंह ने बताया कि सेना के जवानों की लगन और गुरु महाराज के प्रति उनकी आस्था के कारण ही हर वर्ष समय से पहले यात्रा मार्ग को सुचारु कर दिया जाता है। इस बार भी प्रयास है कि कपाट खुलने से पहले मार्ग पूरी तरह तैयार हो जाए।



उन्होंने कहा कि बर्फ हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है और मौसम अनुकूल रहने पर जल्द ही पूरे मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित कर दिया जाएगा। सभी की कोशिश है कि तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हेमकुंड साहिब यात्रा हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र होती है। प्रशासन, सेना और सेवादारों के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रा सुरक्षित और सुगम रूप से संपन्न हो सके।

