भविष्य बदरी धाम के कपाट खुले, श्रद्धा और उत्सव का माहौल

भविष्य बदरी धाम के कपाट खुले, श्रद्धा और उत्सव का माहौल

स्थान : चमोली 
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पंच बदरी धामों में प्रमुख भविष्य बदरी मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। यह शुभ अवसर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के मुहूर्त के साथ ही प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर संपन्न हुआ।

मुख्य पुजारी संजय प्रसाद डिमरी की अगुवाई में सुभाई गांव के ग्रामीणों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर के कपाट खोले गए। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान श्री हरि नारायण के दर्शन किए।

इस पावन अवसर पर सुभाई गांव के ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार अपनी नई फसल गेहूं और जौ की हरी बालियां भगवान भविष्य बदरी को अर्पित कीं। यह परंपरा क्षेत्र की आस्था और कृषि संस्कृति के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।

स्थानीय निवासी रघुवीर सिंह ने बताया कि कपाट खुलने के दिन पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहता है। लोग पारंपरिक मांगल गीत गाते हुए अपने घरों से नई फसल की बालियां मंदिर में अर्पित करने आते हैं।

कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में अगले छह महीनों के लिए नित्य पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी बीकेटीसी द्वारा नियुक्त पुजारियों को सौंपी गई है। इस दौरान अभिषेक, भोग और विशेष धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से संपन्न किए जाएंगे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भविष्य बदरी मंदिर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आस्था यह भी है कि जब भगवान नृसिंह के बाएं हाथ की कलाई कमजोर होकर टूटेगी और ज्योतिर्मठ के पास जय-विजय पर्वत मिल जाएंगे, तब बद्रीनाथ की राह बंद हो जाएगी और भगवान बदरी नारायण भविष्य बदरी धाम में प्रकट होंगे।

इसी आस्था के कारण पंच बदरी धाम में आने वाले श्रद्धालु भविष्य बदरी के दर्शन को विशेष पुण्यकारी मानते हैं और चारधाम यात्रा के दौरान यहां बड़ी संख्या में दर्शन हेतु पहुंचते हैं।

चमोली जिले की सुरम्य सुभाई घाटी में स्थित यह मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित माना जाता है और इसकी परंपरा बद्रीनाथ धाम से गहराई से जुड़ी हुई है। हर वर्ष बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने और बंद होने की तिथि के अनुसार ही भविष्य बदरी मंदिर के कपाट भी खोले और बंद किए जाते हैं।

आज के इस शुभ अवसर पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे सुभाई गांव और आसपास का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।