खैर के पेड़ों की लकड़ी तस्करी के मामले में उच्च अधिकारी मौन, हल्द्वानी के रनसाली रेंज के मामले को दबाने में लगा वन महकमा

खैर के पेड़ों की लकड़ी तस्करी के मामले में उच्च अधिकारी मौन, हल्द्वानी के रनसाली रेंज के मामले को दबाने में लगा वन महकमा

स्थान- लालकुआं
रिपोर्टर- ऐजाज हुसैन

तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी वन प्रभाग की रनसाली रेंज में वन कर्मियों की लापरवाही के चलते बेशकीमती खैर व सागौन के पेड़ों की लकड़ी की तस्करी का मामला चर्चा का बिषय बना हुआ है।

बता दें कि तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी वन प्रभाग की रनसाली रेंज के जंगलों में दर्जनों खैर व सागौन के पेड़ों के अवैध कटान और तस्करी से परेशान स्थानीय वन गुर्जरों ने रेंज में तैनात वन कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मामले कि लिखित शिकायत वन विभाग के उच्च अधिकारियों समेत क्षेत्रीय विधायक डाॅ. मोहन सिंह बिष्ट से की थी। इस मामले में वन गुर्जरों द्वारा बीती 17 जुलाई को खैर व सागौन की लकड़ी से लदी एक ट्रैक्टर की ट्राली को भी पकड़कर वन विभाग को सौंपा गया।

लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने तस्करों पर कार्रवाई के बजाए उल्टे वन गुर्जरों पर ही तस्करी का आरोप लगाते हुए उनकी एक मोटरसाइकिल पकड़कर सीज कर दी। जिसके बाद वन गुर्जरों ने वन महकमा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मीडिया के सामने उक्त जंगल से खैर के लगभग 15 पेड़ों के काटे जाने का खुलासा किया। वहीं मामला मीडिया में आने के बाद वन विभाग ने आनन-फानन में कुछ लकड़ी बरामद भी कर ली।

इधर वन गुर्जरों द्वारा इस मामले की गम्भीरता को देखते हुए इसकी शिकायत सूबे के अपर प्रमुख वन संरक्षक डाॅ. समीर सिन्हा से भी की गई जिसके बाद उनके द्वारा मामले की जांच कुमाऊं कजंरवेटर को दी। बताया जा रहा है कि उच्च अधिकारियों के आदेश के बावजूद वन विभाग द्वारा जांच में लापरवाही बरती जा रही है। साथ ही इस पूरे मामले को दबाने की भी कोशिश की जा रही है। फिलहाल वन महकमा और वन गुर्जरों के बीच इस मामले को लेकर समझौता बैठकों का दौर जारी है।

वहीं हरिद्वार पहुंचे सूबे के प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) डॉ. धनजय मोहन से जब हल्द्वानी वन प्रभाग के रनसाली रेंज में बेशकीमती खैर व सागौन की लकड़ी की तस्करी मामले को लेकर जब मीडिया कर्मियों द्वारा इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई को लेकर जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने चुप्पी साध ली और मीडिया के सवालों से बचते नजर आए।
प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) द्वारा इस मामले में साधी गई चुप्पी पर्यावरण प्रेमियों में चर्चा का बिषय बनी हुई है।