
स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट


पुरानी तहसील स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल लंबे समय से जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। अस्पताल का अपना भवन नहीं होने के कारण यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों के साथ कर्मचारियों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


अस्पताल में प्रतिदिन करीब 70 से 80 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। यहां मरीजों को सामान्य आयुर्वेदिक उपचार के साथ पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।




अस्पताल में विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक दवाइयां भी मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बनी रहती है।


इसके बावजूद अस्पताल भवन की बदहाल स्थिति व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रही है। जर्जर भवन के कारण मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।



बरसात के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। भवन में जगह-जगह से पानी टपकने और रिसाव होने के कारण अस्पताल के कक्षों में कामकाज प्रभावित होता है।
कर्मचारियों के अनुसार बारिश के दौरान जरूरी सामान और दवाइयों को सुरक्षित रखना भी चुनौती बन जाता है। वहीं उपचार के लिए आने वाले मरीजों को भी अव्यवस्थाओं के बीच अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।




अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि भवन की समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।


उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान भवन की समुचित मरम्मत करा दी जाए या अस्पताल के लिए नया भवन उपलब्ध कराया जाए तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में काफी मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों की भी मांग है कि आयुर्वेदिक अस्पताल की उपयोगिता और बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए जल्द भवन की समस्या का समाधान किया जाए, ताकि मरीजों और कर्मचारियों को सुरक्षित तथा बेहतर वातावरण मिल सके।

