
स्थान : थराली
ब्यूरो रिपोर्ट


विकासखंड के देवसारी गांव के सोडिंग लगा त्रिकोट के रोयाणा तोक में बरसात का मौसम ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनकर आता है। भारी बारिश के दौरान यहां रहने वाले लोग भूस्खलन और भूधंसाव के खतरे के बीच रात गुजारने को मजबूर हैं।


ग्रामीणों के अनुसार एक ओर पिंडर नदी के तट से लगातार हो रहा कटाव और भूस्खलन आबादी के लिए खतरा बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर गांव के पीछे पहाड़ी से बहने वाला बारिश का पानी घरों के नीचे से निकल रहा है। इससे कई आवासीय मकानों में धंसाव की स्थिति बन रही है।



कई घरों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। नदी की ओर से हो रहे भूस्खलन के कारण गांव के पैदल रास्ते और कृषि भूमि भी लगातार कटाव की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब आवासीय मकान और मोबाइल टावर भी खतरे की जद में हैं।



ग्रामीणों ने प्रशासन से पहाड़ी से आने वाले पानी की उचित निकासी की व्यवस्था करने और पिंडर नदी की ओर से हो रहे कटाव को रोकने के लिए सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा नुकसान हो सकता है।



स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप भी लगाया है। ग्रामीणों के मुताबिक भूस्खलन और मकानों पर मंडरा रहे खतरे की जानकारी उपजिलाधिकारी थराली को दी गई थी और प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण की मांग की गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल राजस्व उपनिरीक्षक को मौके पर भेजा गया, लेकिन उसके बाद सुरक्षात्मक कार्यों को लेकर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी और भय दोनों बढ़ रहे हैं।




स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2013 से ही रोयाणा तोक में भूधंसाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। प्रत्येक बरसात में घरों के पीछे मलबा आने, रास्ते क्षतिग्रस्त होने और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की घटनाएं होती हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भूगर्भ सर्वेक्षण टीम भी क्षेत्र का निरीक्षण कर चुकी है। सर्वे रिपोर्ट में इस इलाके को भूस्खलन संभावित क्षेत्र बताते हुए विस्थापन की बात कही गई थी, लेकिन आरोप है कि इस रिपोर्ट पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
प्रभावित ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से आवासीय मकानों, कृषि भूमि और रास्तों की सुरक्षा के लिए जल्द स्थायी उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षात्मक कार्यों में देरी से आगामी भारी बारिश के दौरान खतरा और बढ़ सकता है।

