लोहाघाट डाकघर बना स्थानीय उत्पादों का नया बाजार, देश-विदेश तक पहुंच रहे पहाड़ के उत्पाद

लोहाघाट डाकघर बना स्थानीय उत्पादों का नया बाजार, देश-विदेश तक पहुंच रहे पहाड़ के उत्पाद

स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

चंपावत जिले का लोहाघाट डाकघर अब केवल पत्र और पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं रह गया है। डाक विभाग स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश के बाजार तक पहुंचाकर क्षेत्रीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

डाक विभाग के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव राकेश बोरा ने बताया कि लोहाघाट डाकघर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पादों को देश-विदेश तक भेजा जा रहा है। साथ ही विदेशों से आने वाले पार्सलों की भी समयबद्ध डिलीवरी ग्राहकों तक सुनिश्चित की जा रही है। इससे स्थानीय उत्पादकों को नए बाजार मिलने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।

उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से डाकघर परिसर में महिलाओं द्वारा निर्मित राखियां और टेडी बियर का विशेष स्टॉल लगाया गया है। डाकघर आने वाले ग्राहक इन राखियों को खरीदकर स्पीड पोस्ट के माध्यम से अपने परिजनों और शुभचिंतकों को भेज रहे हैं, जिससे महिला समूहों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

रक्षाबंधन के अवसर पर डाक विभाग द्वारा विशेष डाक सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। राकेश बोरा ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी जाने वाली राखी मेल पर डाक शुल्क में 10 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। यह सुविधा प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन से 15 दिन पूर्व लागू की जाती है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी राखियां समय पर और रियायती दरों पर भेज सकें।

उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि यदि वे अपने किसी उत्पाद या पार्सल को देश अथवा विदेश भेजना चाहते हैं तो लोहाघाट डाकघर की विश्वसनीय सेवाओं का लाभ उठाएं।

वहीं, स्टॉल संचालित कर रही महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने डाक विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डाकघर में स्टॉल लगाए जाने से उनकी राखियां हाथों-हाथ बिक रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय कदम बताया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डाक विभाग की इस पहल से न केवल आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी मदद मिल रही है।