जौनपुर-रंवाई को एसटी दर्जा दिलाने की मांग फिर हुई तेज, महापंचायत की तैयारी

जौनपुर-रंवाई को एसटी दर्जा दिलाने की मांग फिर हुई तेज, महापंचायत की तैयारी

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्टर

जौनपुर-रंवाई क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार को मसूरी टाउन हॉल में आयोजित संयुक्त बैठक में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा करते हुए सरकार से पूरे जौनपुर-रंवाई क्षेत्र को एसटी का दर्जा देने की मांग उठाई।

बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि जौनपुर-रंवाई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाता है तो उसका लाभ पूरे क्षेत्र के लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी एक हिस्से को इसका लाभ देकर बाकी क्षेत्रों को वंचित रखना न्यायसंगत नहीं होगा।

बैठक में यह भी कहा गया कि जौनपुर-रंवाई की संस्कृति, बोली, रहन-सहन और पारंपरिक जीवनशैली जौनसार-बावर क्षेत्र से काफी समानता रखती है। इसके बावजूद यह क्षेत्र अब तक अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है।

पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कहा कि इस मांग को मजबूती से सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक तथ्यों और सामाजिक आधार को और मजबूत करने के लिए इतिहासकारों एवं विषय विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी, ताकि मांग को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

जौनपुर प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रदीप कवि और जिला पंचायत सदस्य जोत सिंह रावत ने कहा कि सात दशक पुरानी इस मांग को अब निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने का समय आ गया है। इसके लिए क्षेत्रभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा तथा जल्द ही एक बड़ी महापंचायत का आयोजन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बैठक में मौजूद वक्ताओं ने लोगों से एकजुट होकर इस अभियान को मजबूत करने की अपील की। उनका कहना था कि क्षेत्र के विकास, सामाजिक अधिकारों और पहचान के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा, ताकि सरकार तक एक मजबूत और स्पष्ट संदेश पहुंच सके।

बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की अंतिम प्रक्रिया केंद्र सरकार की संस्तुति, संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही पूरी होती है। ऐसे में सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए इस मांग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।