‘लोक हास्य दिवस’ पर याद किए गए घन्ना भाई, शिक्षा मंत्री ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

‘लोक हास्य दिवस’ पर याद किए गए घन्ना भाई, शिक्षा मंत्री ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्टर

उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार स्वर्गीय घनानंद ‘घन्ना भाई’ की 73वीं जयंती के अवसर पर देहरादून स्थित संस्कृति विभाग प्रेक्षागृह (हरिद्वार बाईपास) में ‘लोक हास्य दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कलाकारों, सांस्कृतिक प्रेमियों और गणमान्य लोगों ने भाग लेकर घन्ना भाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत शामिल हुए। उन्होंने स्वर्गीय घनानंद ‘घन्ना भाई’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके जीवन एवं योगदान को याद करते हुए कहा कि घन्ना भाई ने अपनी कला के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई।

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि घन्ना भाई उत्तराखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर थे। उन्होंने पौड़ी, गढ़वाल और पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को अपने सहज हास्य और लोकभाषा के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया। उनके चुटकुले और हास्य अभिनय आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं।

उन्होंने कहा कि घन्ना भाई की कला हर आयु वर्ग के लोगों को समान रूप से आकर्षित करती थी। उनका अभिनय केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि उसमें समाज को सकारात्मक संदेश देने की अद्भुत क्षमता भी थी। यही कारण है कि वे आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवंत हैं।

शिक्षा मंत्री ने ‘घन्ना भाई फाउंडेशन’ और उनके तीनों बेटों की सराहना करते हुए कहा कि वे घन्ना भाई की सांस्कृतिक विरासत को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इस प्रयास को उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. रावत ने अपने साथ-साथ शिक्षा विभाग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की ओर से भी घन्ना भाई फाउंडेशन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने लोक हास्य प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से घन्ना भाई को श्रद्धांजलि दी। पूरा प्रेक्षागृह ठहाकों, तालियों और भावनात्मक पलों का साक्षी बना रहा। उपस्थित लोगों ने घन्ना भाई के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उनके योगदान को उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा बताया।