

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में आस्था के साथ-साथ परिवार के प्रति सम्मान और संस्कारों की अनूठी मिसाल देखने को मिली। दो युवकों ने अपनी करीब 100 वर्षीय दादी को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल यात्रा पर साथ ले जाकर श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।


सावन के पावन महीने में गंगाजल लेने पहुंचे लाखों शिवभक्तों के बीच यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। दोनों पोते अपने कंधों पर कांवड़ उठाए हुए थे और उसी कांवड़ में उनकी बुजुर्ग दादी विराजमान थीं। इस भावुक नजारे को देखकर राहगीर और श्रद्धालु भी उनकी सराहना करते नजर आए।



दोनों युवकों ने बताया कि उन्होंने अपनी दादी को भी कांवड़ यात्रा का पुण्य दिलाने का संकल्प लिया था। उनका कहना था कि दादी को कंधों पर उठाना उनके लिए कोई बोझ नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और सेवा का प्रतीक है।

गंगाजल भरने के बाद दोनों पोते अपनी दादी के साथ अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। यात्रा मार्ग में लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और इस अनोखी कांवड़ के साथ तस्वीरें एवं वीडियो भी बनाए।
दादी को कांवड़ में बैठाकर ले जाने का यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान की प्रेरणादायक मिसाल बताते हुए दोनों पोतों की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन हैं, वहीं इस तरह के दृश्य समाज को परिवार, संस्कार और सेवा का संदेश भी दे रहे हैं। यह अनोखी कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।


हरिद्वार में सामने आई यह तस्वीर न केवल शिवभक्ति की भावना को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान और उनकी सेवा आज भी सर्वोच्च मूल्यों में शामिल है।

