नेपाल सीमा के गांवों के विद्यार्थियों ने मांगी स्कूल बस, रोज 12 से 20 किमी पैदल चलने को मजबूर

नेपाल सीमा के गांवों के विद्यार्थियों ने मांगी स्कूल बस, रोज 12 से 20 किमी पैदल चलने को मजबूर

स्थान : लोहाघाट
ब्यूरो रिपोर्ट

चंपावत जिले के लोहाघाट विकासखंड के नेपाल सीमा से लगे सुल्ला, पासम और नगरूघाट गांवों के छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी लंबी और कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ रही है। इन गांवों के विद्यार्थी राजकीय इंटर कॉलेज रोसाल पहुंचने के लिए प्रतिदिन कई किलोमीटर का सफर जंगल के कच्चे और दुर्गम रास्तों से तय करते हैं, जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल आने-जाने के दौरान उन्हें प्रतिदिन 15 से 16 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बरसात और गर्मी के मौसम में यह सफर और भी कठिन हो जाता है। जंगल के रास्ते में जंगली जानवरों और जहरीले सांपों का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावक भी लगातार चिंतित रहते हैं।

छात्रों का कहना है कि लंबी दूरी और कठिन रास्तों के कारण कई बार वे समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी चंपावत से विद्या वाहिनी योजना के तहत उनके क्षेत्र में भी स्कूल बस उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उन्हें सुरक्षित और समय पर विद्यालय पहुंचने की सुविधा मिल सके।

इस गंभीर समस्या को लेकर पासम के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी और सुल्ला के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह ने जिलाधिकारी मनीष कुमार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सीमांत क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए स्कूल वाहन की व्यवस्था किए जाने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों ने बताया कि पासम और नगरूघाट के बच्चों को प्रतिदिन लगभग 20 किलोमीटर, जबकि सुल्ला के विद्यार्थियों को करीब 12 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई और जंगल वाले रास्ते से पैदल गुजरना पड़ता है। दुर्गम मार्ग होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है, जिससे बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि जिस प्रकार लेटी डुंगरा तथा जिले के अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए विद्या वाहिनी योजना के अंतर्गत स्कूल वाहनों की व्यवस्था की गई है, उसी प्रकार सुल्ला, पासम और नगरूघाट के बच्चों को भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जनप्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन इस समस्या का शीघ्र समाधान करेंगे।

नेपाल सीमा से लगे सुल्ला और पासम जैसे सीमांत गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में शिक्षा के लिए लंबी और जोखिमभरी पैदल यात्रा बच्चों के भविष्य पर भी असर डाल रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि स्कूल वाहन की व्यवस्था की जाती है तो इससे न केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।