

ब्यूरो रिपोर्ट

नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को अहम बैठक हुई। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया।


कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि प्रदर्शनकारी संगठन के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं। बैठक करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली, जिसमें परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई।


बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रदर्शनकारी पक्ष ने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार इन प्रस्तावों पर विचार कर रही है और अगले दौर की बातचीत में अपना पक्ष स्पष्ट करेगी।


प्रदर्शनकारी संगठन की प्रमुख मांगों में छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना शामिल है। संगठन के प्रतिनिधियों का दावा है कि सरकार ने छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर सिद्धांततः सहमति जताई है, जबकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर निर्णय के लिए समय मांगा गया है।
इस बीच केंद्र सरकार पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक के मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने, दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किए जाने की चर्चा है।


हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निर्णय नहीं होता, तब तक जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच जारी बातचीत से जल्द समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।



