बाजपुर चीनी मिल स्क्रैप घोटाले पर आंदोलन तेज, उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर शनिवार को महाधरने का ऐलान

बाजपुर चीनी मिल स्क्रैप घोटाले पर आंदोलन तेज, उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर शनिवार को महाधरने का ऐलान

स्थान : बाजपुर
रिपोर्ट : विशेष शर्मा

बाजपुर सहकारी चीनी मिल में कथित करोड़ों रुपये के स्क्रैप घोटाले को लेकर कांग्रेस और किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को दूसरे दिन भी चीनी मिल गेट पर धरना जारी रहा। आंदोलनकारियों ने प्रधान प्रबंधक (जीएम) सहित घोटाले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने, मुकदमा दर्ज करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। साथ ही शनिवार को एसडीएम कार्यालय पर महाधरना एवं प्रदर्शन करने की घोषणा की गई।

धरने को संबोधित करते हुए किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नवदीप सिंह कंग ने कहा कि जब तक घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों और मिल के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा तथा शनिवार को बड़ी संख्या में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।

पालिका अध्यक्ष गुरजीत सिंह गित्ते ने प्रधान प्रबंधक सहित संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। वहीं किसान नेता विजेंद्र सिंह डोगरा ने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को दबाने की कोशिश की जाती है, जबकि बड़े अधिकारियों को बचाया जाता है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

किसान नेता अजीत प्रताप सिंह रंधावा ने आरोप लगाया कि स्क्रैप टेंडर की आड़ में मिल का कीमती सामान भी बाहर ले जाया गया। उन्होंने कहा कि घोटाले की शिकायत करने वाले कर्मचारियों को डराया-धमकाया गया और उनका वेतन काटने की चेतावनी दी गई। उनका कहना था कि इससे कर्मचारियों में भय का माहौल बनाया गया है।

रंधावा ने कहा कि बाजपुर चीनी मिल की स्थापना में क्षेत्र के किसानों और उनके पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है तथा किसान आज भी इस मिल के शेयरधारक हैं। इसलिए मिल की संपत्ति की रक्षा करना किसानों की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि किसानों का वर्तमान जांच समिति पर भरोसा नहीं है, क्योंकि एडीएम की अध्यक्षता में गठित समिति से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में गन्ना मंत्री से भी वार्ता हुई है। उनके अनुसार गन्ना मंत्री ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की जांच अपर सचिव या सचिव स्तर की स्वतंत्र समिति से कराई जाएगी। किसानों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।