

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने शिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।


डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि आयोग पिछले तीन वर्षों से लगातार स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों में नियमित फायर ऑडिट कराने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। उनका कहना है कि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी बेहद आवश्यक है।



उन्होंने कहा कि कई कोचिंग सेंटरों में फायर एग्जिट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती, जबकि सीमित स्थानों पर अत्यधिक संख्या में छात्र मौजूद रहते हैं। ऐसी परिस्थितियां किसी भी आपात स्थिति में बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं, इसलिए संचालकों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।


डॉ. खन्ना ने विकासनगर में हुई एक दुखद घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक घर में आग लगने के दौरान सिलेंडर फटने से बच्चों की जान चली गई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी गंभीर और जानलेवा साबित हो सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अग्निशमन उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। संस्थानों में आग बुझाने वाले ब्लैंकेट, पर्याप्त मात्रा में पानी की उपलब्धता, कार्यशील सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन निकास मार्गों का हर समय बाधा रहित होना भी उतना ही आवश्यक है।

आयोग की अध्यक्ष ने स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से अपील की कि वे अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पूर्ण पालन करें। उन्होंने कहा कि बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।


डॉ. गीता खन्ना ने राज्य सरकार द्वारा राज्यव्यापी फायर ऑडिट शुरू करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नियमित निरीक्षण और कड़े सुरक्षा प्रावधान लागू होने से भविष्य में आगजनी जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

