अमेरिका ने ब्राजील पर लगाया 25% टैरिफ, बढ़ा ट्रेड वॉर का खतरा

अमेरिका ने ब्राजील पर लगाया 25% टैरिफ, बढ़ा ट्रेड वॉर का खतरा

ब्यूरो रिपोर्ट

अमेरिका ने अपनी सख्त व्यापार नीति को आगे बढ़ाते हुए ब्राजील से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह नया टैरिफ 22 जुलाई से प्रभावी होगा। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह कदम ब्राजील की व्यापारिक नीतियों की एक साल तक चली जांच के बाद उठाया गया है। अमेरिका का आरोप है कि ब्राजील की कुछ नीतियां अमेरिकी कंपनियों और कारोबारियों के हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं और वहां अमेरिकी उत्पादों को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं।

हालांकि, अमेरिका ने कुछ जरूरी उत्पादों को नए टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें ब्राजील से आने वाला बीफ, कॉफी और विमान के कुछ चुनिंदा स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं। इसके अलावा उन उत्पादों को भी छूट दी गई है, जिनका उत्पादन अमेरिका में नहीं होता है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीयर ने कहा कि ब्राजील की कुछ डिजिटल व्यापार नीतियां और सरकारी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम PIX निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहे हैं। इसी आधार पर अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह कार्रवाई की है।

यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उस व्यापार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए आयात शुल्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पहले भी अमेरिका कई देशों की व्यापार नीतियों की समीक्षा कर चुका है।

वहीं, ब्राजील सरकार ने अमेरिका के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। ब्राजील का कहना है कि यह एकतरफा और अनुचित कार्रवाई है। ब्राजील सरकार ने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में अमेरिका को ब्राजील के साथ व्यापार में बड़ा लाभ मिला है और लगाए गए आरोप निराधार हैं।

ब्राजील ने कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों, रोजगार और अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश करने के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।

अमेरिका और ब्राजील के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव वैश्विक बाजार पर भी असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत से समाधान नहीं निकला तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सप्लाई चेन और कई उद्योगों पर पड़ सकता है।