

स्थान : खटीमा
रिपोर्टर : अशोक सरकार

ऊधम सिंह नगर के खटीमा स्थित सरकारी अस्पताल से सात डॉक्टरों के अचानक तबादले के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार से मरीजों के हित में तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है।


कांग्रेस विधायक गोपाल सिंह राणा ने कहा कि खटीमा अस्पताल पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। उनके अनुसार अस्पताल में करीब 16 डॉक्टरों के पद पहले से रिक्त हैं और ऐसे में एक साथ सात डॉक्टरों का तबादला स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।



उन्होंने कहा कि खटीमा मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र भी है, जहां दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की संख्या कम होने से मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार और अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


विधायक राणा ने सरकार से मांग की कि जिन चिकित्सकों का तबादला किया गया है, उनके स्थान पर जल्द नए डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए ताकि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों और आम जनता को परेशानी न उठानी पड़े।

उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी प्रकोष्ठ यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष शिव शंकर भाटिया ने भी तबादले के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि पहले से डॉक्टरों की कमी वाले अस्पताल से चिकित्सकों का स्थानांतरण चिंता का विषय है।


समाजसेवी आरिफ अंसारी ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को पहले अस्पताल में रिक्त पदों को भरना चाहिए। उनका कहना है कि पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना तबादले करने से आम मरीजों को सबसे अधिक नुकसान होगा।


स्थानीय लोगों का भी कहना है कि खटीमा अस्पताल क्षेत्र का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल डॉक्टरों के तबादले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है। अब सभी की निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि खटीमा अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

