फूलों की घाटी में पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद, राजस्व में भी बड़ा उछाल

फूलों की घाटी में पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद, राजस्व में भी बड़ा उछाल

स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

चमोली जनपद की उच्च हिमालयी भ्यूंडार घाटी स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों दुर्लभ अल्पाइन हिमालयी पुष्पों की रंगत और प्रकृति प्रेमी पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार नजर आ रहा है। रंग-बिरंगे फूलों की विविध प्रजातियों ने घाटी की सुंदरता को और भी मनमोहक बना दिया है।

ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति वैज्ञानिक फ्रैंक स्मिथ की खोजी इस नंदन कानन को वर्ष 2005 में यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर का दर्जा प्राप्त हुआ था। अपनी जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों के कारण यह घाटी देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

इस वर्ष बुधवार को आम पर्यटकों के लिए खोली गई यह घाटी अब एक माह पूरा कर चुकी है। शुरुआती एक महीने में ही पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद दर्ज होने से पार्क प्रशासन के चेहरे खिले हुए हैं, वहीं राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डीएफओ नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान अभिमन्यु ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुधवार से मंगलवार तक कुल 7,294 पर्यटक घाटी पहुंचे, जिनमें 7,260 भारतीय और 34 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

इस अवधि में प्रवेश शुल्क से लगभग 11 लाख 6 हजार रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं पिछले वर्ष जून माह में केवल 3,898 पर्यटक पहुंचे थे, जिनमें 3,833 भारतीय और 65 विदेशी शामिल थे, और उस समय राजस्व लगभग 7 लाख 80 हजार रुपये था।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष पर्यटकों की आमद और राजस्व दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार रिकॉर्ड टूटने की संभावना जताई जा रही है।

वैली ऑफ फ्लावर्स की रेंज अधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि पार्क कर्मियों द्वारा लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पर्यटकों को प्रवेश द्वार पर ही नियमों और दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्लास्टिक मुक्त घाटी बनाए रखने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए पार्क कर्मी लगातार तैनात हैं और दुर्लभ पुष्पों के बारे में उन्हें जानकारी भी दी जा रही है। मानसून सीजन के दौरान जुलाई से अगस्त के बीच घाटी में पुष्पों की जैव विविधता अपने चरम पर रहती है, जिससे आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।