

ब्यरो रिपोर्ट

राज्य में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र बुलाया गया, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान कई विधायकों ने महिला आरक्षण को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे।


सत्र की शुरुआत में सरकार की ओर से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सरकार ने विपक्ष पर इस विधेयक के प्रति असहयोग का आरोप भी लगाया।

विपक्षी दलों ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठते हैं। विपक्ष का कहना था कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर वास्तविक चर्चा से भटकाया जा रहा है।

बहस के दौरान भाजपा विधायक अरविंद पांडेय के एक बयान ने सदन का माहौल और अधिक गरमा दिया। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी समझ में “महिलाओं के व्यवहार में बचत की प्रवृत्ति कभी-कभी गलत तरीके से व्याख्यायित हो जाती है”, जिसे उन्होंने विवादित शब्दों में व्यक्त किया।
उन्होंने आगे उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाएं परिवार की जरूरतों के लिए अक्सर घर से पैसे का प्रबंधन करती हैं और गहने बनवाती हैं, जिन्हें वे कठिन समय में परिवार की सहायता के लिए उपयोग करती हैं। उनके इस बयान पर सदन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

विवाद बढ़ने पर अरविंद पांडेय ने यह भी कहा कि यदि उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो वे माफी मांगने के लिए तैयार हैं। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताते हुए सदन में नारेबाजी और विरोध दर्ज कराया।


इसी बीच भाजपा ने विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में मजबूत करना है, न कि इसे विवाद का विषय बनाना।

सत्र के अंत में माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन सरकार ने संकेत दिया कि वह अधिनियम को लेकर आगे भी चर्चा और सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी रखेगी। वहीं, विपक्ष ने इस पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा और संवैधानिक दृष्टि से जांच की मांग की है।

