


देहरादून

वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल की 50वीं बरसी पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।




जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है, वहीं कांग्रेस ने इस कदम को ‘राष्ट्रहित में उठाया गया फैसला’ बताया है।



भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने अपने निजी स्वार्थ और कुर्सी बचाने के लिए आपातकाल थोप दिया था। ]



जिन्होंने इसका विरोध किया, उन्हें जेल में डाल दिया गया। लोकतंत्र की हत्या की गई थी और जनता की आवाज को दबा दिया गया था।”

इसके जवाब में कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा, “आपातकाल की घोषणा देश को बाहरी ताकतों और आंतरिक अस्थिरता से बचाने के लिए की गई थी। उस समय के हालात को समझना जरूरी है। तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) प्रमुख का भी बयान है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी आपातकाल का समर्थन किया था।”


आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर जहां बीजेपी इसे ‘काले अध्याय’ के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘जरूरी राष्ट्रीय कदम’ करार दे रही है। देश के राजनीतिक इतिहास के इस अहम मोड़ पर एक बार फिर विचारधाराओं की टकराहट देखने को मिल रही है।



