

लोकेशन :- लालकुआँ
रिपोर्टर :- मुन्ना अंसारी


तराई पूर्वी वन प्रभाग के डॉली रेंज क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला बोड़खत्ता क्षेत्र का है, जहां जंगल में लकड़ी बीनने गई एक महिला पर जंगली हाथी ने अचानक हमला कर दिया। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं जंगल में निवास करने वाले परिवारों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई है।


जानकारी के अनुसार बोड़खत्ता निवासी गुर्जर समुदाय की महिला जुलेखा जंगल में लकड़ी बीनने गई थी। इसी दौरान अचानक सामने आए जंगली हाथी ने उस पर हमला कर दिया। हाथी के हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद घायल महिला को उपचार के लिए निजी चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया।




घायल महिला को बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी स्थित डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार हाथी के हमले में महिला की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है। महिला की हालत को देखते हुए उसका उपचार किया जा रहा है।



इधर, घटना के बाद बोड़खत्ता सहित डॉली रेंज के आसपास के वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। विशेष रूप से जंगल के आसपास रहने वाले परिवारों को अपनी दैनिक गतिविधियों के दौरान वन्यजीवों के हमलों का डर सताता रहता है।


ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि वन्यजीवों के लगातार बढ़ते खतरे के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को जंगली हाथियों और अन्य वन्यजीवों के हमलों से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल के आसपास रहने वाले परिवारों का जीवन पहले से ही कठिन परिस्थितियों में गुजरता है। ऐसे में वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि वन विभाग ने समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए तो भविष्य में इस प्रकार की और घटनाएं सामने आ सकती हैं।



घटना को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने और जंगली हाथियों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने की मांग की है। साथ ही वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वन्यजीवों की आवाजाही के संबंध में समय रहते सतर्क करने तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की आवश्यकता जताई है।

ग्रामीणों ने घायल महिला के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग को वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, ताकि जंगल के आसपास रहने वाले परिवार सुरक्षित रह सकें।
फिलहाल घायल महिला का डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में उपचार जारी है। वहीं घटना के बाद डॉली रेंज क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाकर क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और वन्यजीवों के हमलों की रोकथाम के लिए ठोस इंतजाम करने की मांग की है।

