

ब्यूरो रिपोर्ट


दीपावली और छठ महापर्व पर घर लौटने वाले यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और अन्य महानगरों से बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश आने वाली अधिकांश ट्रेनों में कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि त्योहार पर परिवार के साथ खुशियां मनाने की चाहत में लोग महंगे किराए पर निजी बसों, विमानों और अन्य साधनों से सफर करने को मजबूर हैं। कई यात्रियों को घर पहुंचने के लिए हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।


यात्रियों की परेशानी का एक हैरान करने वाला मामला देवरिया जिले के भागलपुर में सामने आया। बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले सुरेंद्र और वीरेंद्र को बेंगलुरु से घर आने के लिए ट्रेन का टिकट नहीं मिला तो दोनों ने ऑटो रिजर्व कर लिया और उसी से बिहार के लिए निकल पड़े। शुक्रवार को भागलपुर में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका तो दोनों ने अपनी आपबीती सुनाई। लंबी दूरी का यह सफर और उनकी मजबूरी जानकर पुलिसकर्मी ही नहीं, आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए।




दरअसल, बिहार के पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर सहित पूर्वांचल के लाखों लोग दीपावली और छठ पर्व पर अपने घर लौटने के लिए परेशान हैं। नियमित ट्रेनों के साथ पूजा स्पेशल ट्रेनों में भी कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। स्लीपर से लेकर वातानुकूलित श्रेणियों तक लंबी प्रतीक्षा सूची के कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। कई लोगों की त्योहार पर परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा टिकट के अभाव में अधूरी रह जाने की आशंका है।


ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने का असर सड़क परिवहन पर भी दिखाई दे रहा है। दिल्ली, अमृतसर, मुंबई और पुणे से बड़ी संख्या में यात्री निजी बसों के जरिए गोरखपुर पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी उन्हें अपने गांव और कस्बों तक जाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार और शनिवार को गोरखपुर बस स्टेशन पर तमकुही, कसया और पडरौना रूट की बसों में यात्रियों की भारी भीड़ रही। बसों में सीट पाने के लिए यात्रियों के बीच धक्कामुक्की तक की नौबत आ गई।



त्योहारी भीड़ के कारण निजी बस संचालकों और विमान कंपनियों के किराए में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ट्रांसपोर्टर गुड्डू के अनुसार दिल्ली और मुंबई से गोरखपुर पहुंचना लगातार महंगा होता जा रहा है। विमान किराया सामान्य दिनों की अपेक्षा तीन से चार गुना तक बढ़ गया है। एक और दो नवंबर को दिल्ली से गोरखपुर का हवाई किराया करीब 16 हजार रुपये तक पहुंच गया था, जबकि बाद में यह 20 हजार रुपये तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। वहीं निजी स्लीपर बसों में भी यात्रियों को तीन से चार हजार रुपये तक किराया देना पड़ रहा है।
यात्रियों का कहना है कि त्योहार के अवसर पर घर पहुंचने के लिए उन्हें सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जो बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं। ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने और बसों में भारी भीड़ के कारण लोगों को लंबी दूरी की यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छठ पर्व के नजदीक आने के साथ यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।



रेलवे की स्थिति पर नजर डालें तो दिल्ली, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, बांद्रा, पुणे, सूरत, अहमदाबाद, हैदराबाद और बेंगलुरु से गोरखपुर आने वाली ट्रेनों में 10 से 14 नवंबर तक टिकटों की भारी मांग बनी हुई है। कई ट्रेनों में नो रूम की स्थिति के चलते बुकिंग बंद हो चुकी है। स्लीपर और एसी थर्ड श्रेणी में प्रतीक्षा सूची 200 के पार पहुंच गई है। गोरखधाम, वैशाली, कुशीनगर, एलटीटी सुपरफास्ट और दादर एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में भी कन्फर्म टिकट मिलना बेहद मुश्किल हो गया है।


इधर, यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने गोरखपुर और लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार के अनुसार 05097/05098 गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर पूजा स्पेशल ट्रेन दो फेरों में चलाई जाएगी। यह ट्रेन गोरखपुर से 11 और 18 नवंबर को रात 8 बजकर 55 मिनट पर रवाना होगी, जबकि लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 13 और 20 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर प्रस्थान करेगी। ट्रेन में सामान्य द्वितीय श्रेणी के चार, शयनयान के सात और वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी श्रेणी के सात कोच लगाए जाएंगे।
वहीं परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह ने बताया कि दीपावली के मद्देनजर स्थानीय मार्गों पर बसों की संख्या और फेरों में बढ़ोतरी की गई है, ताकि यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी न हो। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की मांग के अनुसार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है और कुछ ट्रेनों में अभी भी बर्थ उपलब्ध हैं। हालांकि त्योहारी भीड़ के बीच घर लौटने की जद्दोजहद जारी है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेल और सड़क परिवहन की व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

