हल्द्वानी में नजूल भूमि पर अवैध निर्माण के आरोप, कोली गार्डन में धड़ल्ले से चल रहे निर्माण कार्य, प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हल्द्वानी में नजूल भूमि पर अवैध निर्माण के आरोप, कोली गार्डन में धड़ल्ले से चल रहे निर्माण कार्य, प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

शहर में कथित अवैध निर्माण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला हल्द्वानी के कोली गार्डन क्षेत्र का है, जहां नजूल भूमि पर बिना नक्शा स्वीकृत कराए दो आलीशान भवनों का निर्माण किए जाने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और भवनों में लिंटर डालने का काम भी किया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विकास प्राधिकरण की निगरानी के बावजूद इस प्रकार के निर्माण कार्य कैसे जारी हैं और संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

कोली गार्डन क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि इन भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र के कराया जा रहा है। दोनों भवनों में प्रथम और द्वितीय तल के लिंटर तक का कार्य होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आने पर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिन स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा है, वे नजूल भूमि से संबंधित बताए जा रहे हैं। यदि बिना आवश्यक अनुमति और नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण कराया जा रहा है तो इससे सरकार और विकास प्राधिकरण को राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। हालांकि संबंधित भूमि की कानूनी स्थिति, भवनों के स्वीकृत मानचित्र और राजस्व नुकसान की वास्तविक राशि की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

शहर में आम नागरिकों को भवन निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने और विभिन्न औपचारिकताएं पूरी करने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर बिना आवश्यक स्वीकृति के बड़े भवनों का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होने से विकास प्राधिकरण की निगरानी और नियमों के समान रूप से पालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्राधिकरण की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि छोटे मकानों और दुकानों के निर्माण में नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग जैसी कार्रवाई की जाती है, लेकिन बड़े निर्माण कार्यों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई देती। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण संबंधी नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं या फिर कार्रवाई में भेदभाव हो रहा है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

कोली गार्डन में चल रहे कथित अवैध निर्माण का मामला केवल भवन निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षा से जुड़ा गंभीर पहलू भी सामने आया है। आरोप है कि निर्माणाधीन भवन हाईटेंशन विद्युत तारों के बेहद नजदीक बनाए जा रहे हैं। यदि विद्युत लाइनों से निर्धारित सुरक्षित दूरी का पालन नहीं किया गया है तो भविष्य में करंट लगने या किसी अन्य बड़ी दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।

हाईटेंशन विद्युत लाइनों के आसपास निर्माण कार्य किए जाने के मामले में विद्युत विभाग की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे स्थानों पर भवनों की ऊंचाई, विद्युत तारों से दूरी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। सवाल यह है कि क्या निर्माण से पहले संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति ली गई है और क्या विद्युत विभाग ने इन स्थानों का निरीक्षण किया है। इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

हल्द्वानी में अवैध निर्माण के मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कोली गार्डन में चल रहे दोनों निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त निरीक्षण किए जाने की आवश्यकता है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित भूमि का स्वामित्व किसके पास है, निर्माण कार्य के लिए मानचित्र स्वीकृत है या नहीं और भवन निर्माण में निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोली गार्डन में चल रहे इन निर्माण कार्यों पर विकास प्राधिकरण और संबंधित विभाग कब संज्ञान लेंगे। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही हाईटेंशन विद्युत लाइनों के पास निर्माण की स्थिति में संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल सुरक्षा जांच जरूरी है। फिलहाल इस पूरे मामले में प्राधिकरण और विद्युत विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही निर्माण की वैधता तथा जिम्मेदारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।