लोहाघाट में गुलदार का आतंक बरकरार, छात्र की मौत के चार दिन बाद भी पकड़ से बाहर, ग्रामीणों में दहशत

लोहाघाट में गुलदार का आतंक बरकरार, छात्र की मौत के चार दिन बाद भी पकड़ से बाहर, ग्रामीणों में दहशत

स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

लोहाघाट के सुई डूंगरी गांव में 13 वर्षीय छात्र हर्षित पुजारी को गुलदार द्वारा निवाला बनाए जाने की घटना के चार दिन बाद भी क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। गुलदार के अब तक पकड़ में नहीं आने से ग्रामीणों में भय लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि अंधेरा होते ही लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द गुलदार को पकड़कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराने की मांग की है।

बीती चार नवंबर की शाम करीब साढ़े छह बजे 13 वर्षीय छात्र हर्षित पुजारी लोहाघाट के रायकोट से मेला देखकर अपने गांव सुई डूंगरी लौट रहा था। इसी दौरान घर से महज 30 मीटर की दूरी पर घात लगाए बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया और उसे उठाकर ले गया। इस दर्दनाक घटना में छात्र की मौत हो गई थी। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भय और शोक का माहौल बना हुआ है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ चंपावत ढीनों पुरुषोत्तम के निर्देश पर वन विभाग की टीमें गुलदार को पकड़ने के प्रयासों में जुटी हुई हैं। लोहाघाट के वन क्षेत्राधिकारी रमेश चंद्र जोशी के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी और गश्त की जा रही है। वन विभाग का दावा है कि गुलदार को पकड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सके।

वन क्षेत्राधिकारी रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि सुई डूंगरी गांव और आसपास के क्षेत्र में गुलदार को पकड़ने के लिए पांच पिंजरे लगाए गए हैं। इसके अलावा गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आठ ट्रैप कैमरे और दो लाइव कैमरे भी लगाए गए हैं। हालांकि अभी तक ट्रैप कैमरों में गुलदार की कोई गतिविधि दर्ज नहीं हुई है। वन विभाग की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

रेंजर जोशी ने बताया कि गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में वन कर्मियों द्वारा दिन-रात गश्त की जा रही है। इस अभियान में डीएफओ चंपावत और वन विभाग के एसडीओ भी शामिल हैं। विभाग की ओर से गुलदार की गतिविधियों का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता जल्द से जल्द गुलदार को पकड़कर स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि शीतकाल के दौरान गुलदार का प्रजनन काल होने के कारण उनके व्यवहार में आक्रामकता बढ़ सकती है। उन्होंने ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को अंधेरे में अकेले बाहर न निकलने, बच्चों को अकेला न छोड़ने और आवश्यक होने पर रात में लाठी तथा टॉर्च लेकर समूह में ही आवाजाही करने की सलाह दी गई है।

रेंजर ने बताया कि सुई डूंगरी के अलावा गल्ला गांव और मटियाल क्षेत्र में भी गुलदार की आवाजाही की सूचना मिलने के बाद पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। वहीं मंगोली क्षेत्र में भी वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है। विभाग द्वारा आसपास के गांवों में भी निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि गुलदार की मौजूदगी का पता लगाकर उसे जल्द पकड़ा जा सके।

इधर, गुलदार के आतंक के कारण सुई डूंगरी और आसपास के गांवों में कर्फ्यू जैसा माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने भय के चलते सुबह की सैर पर जाना तक बंद कर दिया है। शाम ढलते ही गांव की गलियों और रास्तों पर सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार की मौजूदगी से सबसे अधिक खतरा बच्चों की सुरक्षा को लेकर बना हुआ है। लोग अपने बच्चों को घरों से अकेले बाहर भेजने से भी कतरा रहे हैं।

ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक गुलदार वन विभाग की पकड़ से बाहर है। इससे पूरे क्षेत्र में लगातार खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से अभियान तेज करने और गुलदार को जल्द पकड़ने की मांग की है। वहीं वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वन्यजीव गतिविधि की तत्काल सूचना विभाग को देने की अपील की है।