रुड़की के बीएसएम शिक्षण संस्थान की 1500 करोड़ की संपत्ति पर विवाद गहराया, ब्राह्मण समाज ने उठाई SIT जांच की मांग

रुड़की के बीएसएम शिक्षण संस्थान की 1500 करोड़ की संपत्ति पर विवाद गहराया, ब्राह्मण समाज ने उठाई SIT जांच की मांग

स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

रुड़की के प्रतिष्ठित बीएसएम शिक्षण संस्थान की करीब 1500 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति पर अधिकार को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। संस्थान प्रबंधन और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पिछले पांच दिनों से हरिद्वार रोड स्थित परशुराम भवन में धरने पर बैठे ब्राह्मण समाज के लोगों ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर संस्थान प्रबंधन के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने संस्थान की संपत्ति पर एक परिवार द्वारा कथित कब्जे का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की।

पत्रकार वार्ता में सम्राट सुधा ने दावा किया कि बीएसएम शिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1934 में ब्राह्मण समाज द्वारा की गई थी। उनका आरोप है कि बाद में एक परिवार के लोगों ने संस्थान के प्रबंधन पर नियंत्रण स्थापित कर बीएसएम चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन कर लिया। उन्होंने कहा कि संस्थान की संपत्ति मूल रूप से ब्राह्मण समाज की है और समाज के पास इससे संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं साक्ष्य मौजूद हैं।

सम्राट सुधा ने आरोप लगाया कि संस्थान से जुड़ी करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति पर एक परिवार का नियंत्रण है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज इस मामले में लंबे समय से आवाज उठा रहा है, लेकिन अब तक संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एसआईटी जांच कराई जाए, ताकि संस्थान की स्थापना, संपत्ति के स्वामित्व और ट्रस्ट के गठन से जुड़े तथ्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि जांच पूरी होने तक संस्थान में रिसीवर नियुक्त किया जाए, जिससे संपत्ति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित हो सके। सम्राट सुधा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मामले में उचित कार्रवाई नहीं की तो ब्राह्मण समाज आगामी चुनावों में भाजपा का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने इसे समाज के अधिकारों और संस्थान की संपत्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

वहीं ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि सतीश शर्मा ने संस्थान प्रबंधन की ओर से उन्हें फर्जी अध्यक्ष बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2021 में समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से उन्हें अध्यक्ष चुना था। ऐसे में उनके पद को लेकर प्रबंधन द्वारा उठाए जा रहे सवाल पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि समाज की संपत्ति से जुड़े मुद्दे पर आवाज उठाना उनका अधिकार है और इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग जारी रहेगी।

सतीश शर्मा ने बीएसएम शिक्षण संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय बनाने से संबंधित प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए करीब 70 प्रतिशत दस्तावेज फर्जी हैं। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि संस्थान प्रबंधन अपने दस्तावेजों को सही मानता है तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सभी के सामने आ सके।

धरनारत लोगों ने संस्थान प्रबंधन के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें उन्हें ब्लैकमेलिंग के माध्यम से दबाव बनाने वाला बताया गया था। इससे पहले संस्थान के निदेशक रजनीश शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया था कि धरने पर बैठे लोग संस्थान की छवि खराब करने और प्रबंधन पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रबंधन ने दावा किया कि संस्थान से जुड़े मामलों की पहले भी कई बार जांच हो चुकी है और आरोप प्रमाणित नहीं हुए हैं। दो नवंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में प्रबंधन की ओर से लगभग 25 उच्चस्तरीय जांच होने का दावा दर्ज है।

सतीश शर्मा ने प्रबंधन के जांच संबंधी दावों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि पहले एसआईटी या अन्य उच्चस्तरीय जांच में संस्थान को क्लीन चिट मिली है तो उससे संबंधित दस्तावेज और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल पत्रकार वार्ता में जांच का दावा करने से विवाद का समाधान नहीं होगा। इसके लिए सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों का सार्वजनिक होना आवश्यक है।

ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने संस्थान प्रबंधन को आमने-सामने बैठकर वार्ता करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि समाज अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने को तैयार है। यदि प्रबंधन के पास भी अपने दावों के समर्थन में प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने रखा जाए। धरनारत लोगों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि बीएसएम चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े विवाद को लेकर 29 अक्टूबर से धरना जारी है। संस्थान की स्थापना, मूल समिति के अधिकार और ट्रस्ट के गठन को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया है, जबकि धरनारत लोग उच्चस्तरीय जांच पर अड़े हैं। फिलहाल करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति के मूल्यांकन, स्वामित्व और कथित अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विवाद का समाधान संबंधित अभिलेखों की जांच और सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही हो सकेगा।