
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट


केदारनाथ-बद्रीनाथ हेली रूट पर हुए हेलीकॉप्टर हादसे की जांच तेज कर दी गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीमें दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई हैं। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस हादसे से पूरी एविएशन इंडस्ट्री स्तब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्घटना का सटीक कारण अभी तक सामने नहीं आया है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


यूसीएडीए के सीईओ प्रतीक जैन ने बताया कि दुर्घटना से संबंधित अलग-अलग वीडियो फुटेज सामने आ रहे हैं, जिनका जांच एजेंसियां अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर का संचालन अनुभवी और प्रशिक्षित पायलट कर रहे थे, जिनका पूर्व में भारतीय वायुसेना से भी जुड़ाव रहा है। इसके बावजूद दुर्घटना से पहले पायलटों की ओर से कोई मेडे कॉल यानी आपातकालीन संदेश नहीं दिया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि घटनाक्रम बेहद तेजी से हुआ होगा और पायलटों को आपातकालीन संदेश देने का अवसर नहीं मिल पाया।




प्रतीक जैन ने बताया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो और डीजीसीए की टीमें पिछले तीन दिनों से दुर्घटनास्थल पर जांच कर रही हैं। सोमवार के बाद मंगलवार को भी एएआईबी की टीम क्रैश साइट पर पहुंची और दुर्घटना से जुड़े साक्ष्यों की जांच की। जांच एजेंसियां हादसे के तकनीकी पहलुओं, उड़ान की परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है।



हादसे के दिन मौसम की स्थिति को लेकर भी यूसीएडीए के सीईओ ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खराब मौसम के चलते उस दिन सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक बद्रीनाथ हेली रूट पर कोई उड़ान संचालित नहीं की गई थी। मौसम में सुधार और दृश्यता बेहतर होने के बाद ही हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि उड़ान संचालन के दौरान मौसम की स्थिति और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का ध्यान रखा जाता है।


हेलीकॉप्टर हादसे के बाद चारधाम यात्रा में हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर डीजीसीए ने नियम सख्त कर दिए हैं। चारधाम चार्टर्ड हेलीकॉप्टर सेवाओं में एक के बजाय दो पायलट रखने की अनिवार्यता लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उड़ान के दौरान बेहतर निगरानी और आपात परिस्थितियों में सुरक्षा को मजबूत बनाना है। हालांकि, हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने नए नियम को तत्काल लागू करने में व्यावहारिक और आर्थिक कठिनाइयों का हवाला दिया है।

यूसीएडीए के सीईओ ने बताया कि हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के अनुसार यात्रा सीजन समाप्त होने में बहुत कम समय बचा है और अधिकांश यात्रियों ने पहले से निर्धारित किराए पर बुकिंग कराई हुई है। ऐसे में दो पायलटों की व्यवस्था करने से संचालन लागत बढ़ेगी। ऑपरेटरों का कहना है कि अतिरिक्त पायलटों के साथ हेलीकॉप्टरों में तकनीकी बदलाव भी करने पड़ सकते हैं, जिन्हें इतने कम समय में लागू करना व्यावसायिक रूप से संभव नहीं है।



इस मुद्दे को लेकर डीजीसीए, यूसीएडीए और हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के बीच दोबारा बैठक भी की गई। ताजा जानकारी के अनुसार, मौजूदा यात्रा सीजन के शेष दिनों के लिए चारधाम चार्टर्ड हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद रखने पर सहमति बनी है। पहले से बुकिंग कराने वाले यात्रियों को किराया वापस करने की बात कही गई है। दो पायलटों की अनिवार्यता और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं पर अगले यात्रा सीजन से पहले दोबारा विचार-विमर्श किया जाएगा।

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर को चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में बद्रीनाथ से देहरादून लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में पायलट सहित सभी छह लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियां दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हैं।
यूसीएडीए के सीईओ प्रतीक जैन ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दुर्घटना की जांच में सभी संबंधित एजेंसियों को सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के कारणों को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। वहीं, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उड़ान संचालन, मौसम संबंधी निगरानी और सुरक्षा मानकों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

