
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश में चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शादाब शम्स ने इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी की पार्टी के जनाधार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए मुस्लिम समाज की अनदेखी और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।


भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शादाब शम्स ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां प्रत्येक राजनीतिक दल को चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त है। कोई भी पार्टी उत्तराखंड में आकर चुनाव लड़ सकती है, लेकिन उनकी नजर में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का देवभूमि उत्तराखंड में कोई प्रभावी राजनीतिक अस्तित्व या जनाधार नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव लड़ने की चर्चा से किसी राजनीतिक दल की जमीन पर पकड़ साबित नहीं होती।





शादाब शम्स ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक मुस्लिम समाज को केवल चुनावी राजनीति के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम समाज के हितों की वास्तविक आवाज बनने में सफल नहीं रही और चुनाव के समय ही इस वर्ग की समस्याओं को प्रमुखता से उठाती है। शम्स के अनुसार, कांग्रेस की इसी राजनीतिक कार्यशैली को लेकर मुस्लिम समाज के एक हिस्से में नाराजगी है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।


भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की कथित राजनीतिक विफलताओं के कारण पैदा हुई स्थिति का फायदा उठाने के लिए AIMIM उत्तराखंड में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि ओवैसी की पार्टी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने का प्रयास कर रही है। शम्स के मुताबिक, AIMIM की सक्रियता विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन सकती है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है।



शादाब शम्स ने कहा कि यदि AIMIM उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारती है, तो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उसका मुकाबला कांग्रेस से हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि इन क्षेत्रों में ओवैसी की पार्टी कांग्रेस को कड़ी चुनौती देगी। हालांकि यह उनका राजनीतिक आकलन है और AIMIM की ओर से उत्तराखंड में चुनाव लड़ने की आधिकारिक रणनीति तथा उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही चुनावी तस्वीर सामने आएगी।
वहीं भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत का भरोसा जताया। शादाब शम्स ने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड में क्लीन स्वीप करेगी और एक बार फिर सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरेगी। हालांकि चुनाव परिणाम मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेंगे।



उत्तराखंड में AIMIM के संभावित चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी को भी तेज कर दिया है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में ओवैसी की पार्टी की संभावित भागीदारी को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं। विशेष रूप से मुस्लिम आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों में AIMIM की गतिविधियों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM देश के विभिन्न राज्यों में अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करती रही है। उत्तर प्रदेश में भी पार्टी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है और मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है। The Lallantop+1
ऐसे में उत्तराखंड में पार्टी की संभावित चुनावी भागीदारी की चर्चा को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि राज्य में उसकी वास्तविक चुनावी तैयारी और संगठनात्मक स्थिति का आकलन आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही किया जा सकेगा।
फिलहाल उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज होता दिखाई दे रहा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शादाब शम्स ने जहां AIMIM के जनाधार पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पर मुस्लिम समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा की सत्ता में वापसी का दावा भी किया है। अब देखना होगा कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर क्या निर्णय लेती है और कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल इन बयानों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। आगामी चुनाव को लेकर सभी दलों की आधिकारिक रणनीति सामने आने के साथ ही प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होगी।

