
स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट


धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में एक आश्रम में संचालित हो रहे राजकीय महाविद्यालय की बदहाल व्यवस्थाओं और कॉलेज के लिए जमीन आवंटित नहीं होने से नाराज छात्रों का आक्रोश मंगलवार को सड़कों पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में छात्र सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर महाविद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार करने और स्थायी भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।


प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि राजकीय महाविद्यालय पिछले छह वर्षों से भूपतवाला क्षेत्र के एक आश्रम में संचालित किया जा रहा है, लेकिन इतने लंबे समय के बावजूद कॉलेज के लिए अपनी जमीन तक आवंटित नहीं की गई है। छात्रों का कहना है कि स्थायी भवन के अभाव में महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।




छात्रों ने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हरिद्वार के इस राजकीय महाविद्यालय की स्थिति इन दावों से अलग नजर आ रही है। छह वर्ष बीत जाने के बाद भी कॉलेज को अपना परिसर नहीं मिल पाना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। छात्रों ने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द महाविद्यालय के लिए उपयुक्त भूमि आवंटित करे और स्थायी भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराए।


प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने महाविद्यालय में व्याप्त कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि कॉलेज की व्यवस्थाओं में कई खामियां हैं, जिनका समाधान लंबे समय से नहीं किया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि इन समस्याओं के कारण विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अन्य आवश्यक कार्यों में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने शिक्षा विभाग से इन अनियमितताओं की जांच कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने की मांग की।


छात्रों ने परीक्षाओं के परिणामों में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि परीक्षा परिणामों में अनियमितताओं के कारण विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परिणाम संबंधी समस्याओं के चलते छात्रों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर भी असर पड़ रहा है। छात्रों ने मांग की कि परीक्षा परिणामों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए।

सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि महाविद्यालय की समस्याओं की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कॉलेज के लिए भूमि आवंटित कर स्थायी भवन निर्माण की दिशा में कदम उठाए गए होते, तो विद्यार्थियों को आज इन परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।



छात्रों ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाओं का होना आवश्यक है। महाविद्यालय के पास अपना स्थायी परिसर होने से कक्षाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि राजकीय महाविद्यालय को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कॉलेज के लिए जमीन आवंटित करने, शैक्षणिक व्यवस्थाओं में सुधार लाने, परीक्षा परिणामों की गड़बड़ियां दूर करने और विद्यार्थियों की अन्य समस्याओं का समाधान कराने की मांग की गई। छात्रों ने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि महाविद्यालय में पढ़ाई का बेहतर माहौल तैयार हो सके।
छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को लेकर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने पर विचार करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कॉलेज में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के अधिकारों की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। अब छात्रों की निगाहें शासन और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि छह वर्षों से स्थायी भवन की प्रतीक्षा कर रहे राजकीय महाविद्यालय को जमीन कब तक आवंटित होती है और विद्यार्थियों को उनकी समस्याओं से कब राहत मिलती है।

