नैनीताल के एसपी डॉ. जगदीश चन्द्र बने आईपीएस, मुख्यमंत्री धामी और डीजीपी दीपम सेठ ने बैज लगाकर किया सम्मानित

नैनीताल के एसपी डॉ. जगदीश चन्द्र बने आईपीएस, मुख्यमंत्री धामी और डीजीपी दीपम सेठ ने बैज लगाकर किया सम्मानित

स्थान : हल्द्वानी, नैनीताल
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड पुलिस के अधिकारी एवं वर्तमान में नैनीताल जिले में पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात के पद पर तैनात डॉ. जगदीश चन्द्र को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति मिलने से नैनीताल पुलिस परिवार में खुशी का माहौल है। 31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने डॉ. जगदीश चन्द्र को आईपीएस बैज लगाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर दोनों ने उन्हें पदोन्नति की बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. जगदीश चन्द्र को भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति के बाद औपचारिक रूप से आईपीएस बैज से अलंकृत किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। लंबे समय तक राज्य पुलिस सेवा में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने के बाद आईपीएस में पदोन्नति को उनके पुलिस सेवाकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

डॉ. जगदीश चन्द्र की पदोन्नति पर नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने भी उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं, नैनीताल पुलिस परिवार के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। वर्तमान में नैनीताल जिले में अपराध नियंत्रण और यातायात व्यवस्था से जुड़े दायित्व संभाल रहे डॉ. जगदीश चन्द्र की पदोन्नति को पुलिस परिवार के लिए गौरव का अवसर बताया गया।

डॉ. जगदीश चन्द्र का शैक्षणिक सफर भी उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से पर्यावरण विज्ञान में एमएससी की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एमफिल और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। उनकी शिक्षा और शोध से जुड़ी उपलब्धियां वैज्ञानिक क्षेत्र में उनकी रुचि तथा अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाती हैं।

शैक्षणिक उपलब्धियों के दौरान डॉ. जगदीश चन्द्र को कई प्रतिष्ठित शोध छात्रवृत्तियां भी प्राप्त हुईं। एमएससी की पढ़ाई के दौरान उन्हें आईसीएआर-जेआरएफ छात्रवृत्ति मिली, जबकि एमफिल और पीएचडी के दौरान सीएसआईआर-यूजीसी जेआरएफ एवं एसआरएफ जैसी प्रतिष्ठित छात्रवृत्तियों का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त उन्होंने जेआरएफ-नेट अर्थ साइंसेज में भी सफलता प्राप्त की। वर्ष 2025 में उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान विषय में स्नातकोत्तर उपाधि भी हासिल की।

पुलिस सेवा में आने से पहले डॉ. जगदीश चन्द्र वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2002 से 2005 तक उन्होंने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून में वैज्ञानिक के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने रांची और दार्जिलिंग में भी कार्य किया। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा की दिशा में कदम बढ़ाया और वर्ष 2005 में उत्तराखंड राज्य पुलिस सेवा में शामिल हुए।

राज्य पुलिस सेवा में चयनित होने के बाद डॉ. जगदीश चन्द्र ने विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने देहरादून, चमोली और ऊधम सिंह नगर जनपदों में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर सेवाएं दीं। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन से जुड़े कार्यों में अपनी भूमिका निभाई। वर्ष 2013 में उन्हें अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया, जिसके बाद उनकी जिम्मेदारियों का दायरा और बढ़ गया।

अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नति मिलने के बाद डॉ. जगदीश चन्द्र ने देहरादून, काशीपुर और हल्द्वानी में नगर पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 31वीं वाहिनी और आईआरबी-1 में उप सेनानायक के पद पर भी सेवाएं दीं। पुलिस प्रशासन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने का अनुभव प्राप्त करने के बाद वर्तमान में वह नैनीताल जिले में पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात के पद पर तैनात हैं।

अपने पुलिस सेवाकाल के दौरान डॉ. जगदीश चन्द्र ने कई महत्वपूर्ण आयोजनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिम्मेदारियां निभाई हैं। कुंभ मेले में पुलिस व्यवस्था, नंदा राजजात यात्रा के आयोजन और गंभीर अपराधों के अनावरण से जुड़े कार्यों में उनका योगदान रहा है। इसके अतिरिक्त पुलिस बैंड के गठन और स्थापना में भी उन्होंने भूमिका निभाई। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारी के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन किया।

डॉ. जगदीश चन्द्र को उनके सेवाकाल के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2016 में नंदा राजजात यात्रा में योगदान के लिए उन्हें सराहनीय सेवा सम्मान चिह्न प्रदान किया गया। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान उत्कृष्ट सेवाओं के लिए भी उन्हें सराहनीय सेवा सम्मान चिह्न मिला। इसके बाद वर्ष 2025 में भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से उन्हें मेधावी सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।

वर्ष 2026 में भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति डॉ. जगदीश चन्द्र के लंबे प्रशासनिक और पुलिस सेवाकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वैज्ञानिक के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने से लेकर उत्तराखंड पुलिस में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करने तक उनका सफर शिक्षा, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा से जुड़ा रहा है। उनकी पदोन्नति पर मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और नैनीताल पुलिस परिवार की ओर से शुभकामनाएं दी गई हैं।