
लोकेशन,बाज़पुर
रिपोर्टर, विशेष शर्मा

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले की बाजपुर चीनी मिल में दो सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार को प्रशासनिक भवन के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चीनी मिल के चार गन्ना क्रय केंद्र निजी क्षेत्र की सितारगंज चीनी मिल को आवंटित किए जाने का विरोध करते हुए उन्हें वापस बाजपुर चीनी मिल से जोड़ने की मांग उठाई। इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन में की गई कटौती को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। धरने को विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं ने भी समर्थन दिया।

सोमवार सुबह करीब दस बजे बाजपुर चीनी मिल के कर्मचारी शास्त्री भवन के सामने एकत्रित हुए। इसके बाद कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि चीनी मिल पहले से ही गन्ने की कमी की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में मिल को आवंटित चार गन्ना क्रय केंद्रों को दूसरी चीनी मिल से जोड़ने के निर्णय से बाजपुर मिल की स्थिति और प्रभावित हो सकती है।




धरने पर बैठे कर्मचारियों ने बताया कि बाजपुर चीनी मिल को आवंटित चार गन्ना केंद्रों से हर पेराई सत्र में लगभग पांच से छह लाख कुंतल गन्ना प्राप्त होता है। कर्मचारियों के अनुसार, इन केंद्रों को अब निजी क्षेत्र की सितारगंज चीनी मिल को आवंटित कर दिया गया है। इससे बाजपुर चीनी मिल को मिलने वाले गन्ने की मात्रा में कमी आने की आशंका है। कर्मचारियों का कहना है कि मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिलने से पेराई सत्र की अवधि और कम हो सकती है।


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बाजपुर चीनी मिल पहले से ही गन्ने की उपलब्धता कम होने के कारण सीमित अवधि तक पेराई कर पा रही है। ऐसे में चार प्रमुख गन्ना क्रय केंद्रों के दूसरे मिल क्षेत्र में चले जाने से मिल के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कर्मचारियों ने आशंका जताई कि इससे चीनी मिल की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।

कर्मचारियों ने अपनी दूसरी प्रमुख मांग के रूप में वेतन में की गई कटौती को वापस लेने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि वेतन कटौती के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि पूर्व की वेतन व्यवस्था को बहाल किया जाए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी दोनों मांगें चीनी मिल और उससे जुड़े कर्मचारियों के भविष्य से संबंधित हैं।
चीनी मिल कर्मचारियों के धरने को किसान संगठनों का भी समर्थन मिला। किसान यूनियन नेता करम सिंह पड्डा, विजेंद्र सिंह डोगरा, अजीत प्रताप रंधावा, जसवीर सिंह और प्रताप सिंह बाजवा सहित कई किसान नेता अपने साथियों के साथ धरना स्थल पहुंचे। किसान नेताओं ने कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठकर उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बाजपुर चीनी मिल के सुचारु संचालन का मुद्दा केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों के हित भी जुड़े हुए हैं।




धरना स्थल पर मौजूद किसान नेताओं और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि बाजपुर चीनी मिल क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मिल के संचालन पर असर पड़ने से किसानों और कर्मचारियों दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वक्ताओं ने मांग की कि सरकार चारों गन्ना क्रय केंद्रों के आवंटन के फैसले की समीक्षा करे और इन्हें दोबारा बाजपुर चीनी मिल को आवंटित किया जाए।

धरने के दौरान कर्मचारी और किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित दो सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रभारी प्रधान प्रबंधक एवं उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह को सौंपा। ज्ञापन में चारों गन्ना क्रय केंद्रों को बाजपुर चीनी मिल से दोबारा जोड़ने और कर्मचारियों के वेतन में हुई कटौती को बहाल करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की अपील की।
इस दौरान कर्मचारी और किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि चारों गन्ना क्रय केंद्र बाजपुर चीनी मिल को वापस आवंटित नहीं किए गए तो वे कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे। वक्ताओं ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस निर्णय के खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीनी मिल और किसानों के हितों की रक्षा के लिए संगठन अपनी मांगों को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।
फिलहाल बाजपुर चीनी मिल में चार गन्ना क्रय केंद्रों के आवंटन और कर्मचारियों की वेतन कटौती का मुद्दा गरमा गया है। कर्मचारियों और किसान संगठनों ने एक दिवसीय धरना देकर सरकार के सामने अपनी दो सूत्रीय मांगें रखी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गन्ना केंद्रों के स्थानांतरण से मिल की पेराई क्षमता और पेराई सत्र की अवधि प्रभावित हो सकती है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और क्या बाजपुर चीनी मिल को उसके चार गन्ना क्रय केंद्र वापस मिल पाते हैं।

