रामनगर के पूछड़ी में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ महापंचायत, बेघर परिवारों के पुनर्वास और मालिकाना हक की उठी मांग

रामनगर के पूछड़ी में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ महापंचायत, बेघर परिवारों के पुनर्वास और मालिकाना हक की उठी मांग

स्थान : रामनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के रामनगर स्थित पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के समर्थन में रविवार को महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी, नेकी की दीवार के संयोजक तारा चंद्र घिल्डियाल, मालिकाना हक संघर्ष समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान वन विभाग की कार्रवाई से बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास और लंबे समय से वन ग्रामों में रह रहे लोगों को भूमि का मालिकाना हक दिए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

महापंचायत में मौजूद लोगों ने कहा कि वन विभाग की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद कई गरीब परिवारों के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिन मकानों में परिवार वर्षों से रह रहे थे, उनके ध्वस्त होने के बाद प्रभावित लोगों को अपने बच्चों और परिजनों के साथ रहने के लिए सुरक्षित स्थान की आवश्यकता है। लोगों ने सरकार से मांग की कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाए और उनके लिए उचित आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

महापंचायत की अध्यक्षता करते हुए मालिकाना हक संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस. लाल ने बताया कि रामनगर क्षेत्र में कुल 24 वन ग्राम हैं, जिनमें पूछड़ी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि पूछड़ी में हाल ही में वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में कई परिवारों के मकान ध्वस्त कर दिए गए। उनके अनुसार, प्रभावित परिवारों में बड़ी संख्या में मजदूरी और छोटे-मोटे कार्यों से अपना जीवनयापन करने वाले लोग शामिल हैं। ऐसे में मकान ध्वस्त होने के बाद उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ रहने का संकट भी खड़ा हो गया है।

एस. लाल ने कहा कि ठंड का मौसम शुरू हो रहा है और दीपावली का त्योहार भी नजदीक है। ऐसे समय में गरीब परिवारों के मकान टूटने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है, उनके पुनर्वास की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल अस्थायी आवास, राहत और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।

महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सोमवार को रामनगर के उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। इसके अलावा तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपकर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की जाएगी। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ज्ञापन में बेघर हुए परिवारों को दोबारा बसाने, राहत उपलब्ध कराने और वन ग्रामों में वर्षों से रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने की मांग शामिल की जाएगी।

मालिकाना हक संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस. लाल ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों को पर्याप्त समय नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग मजदूर और कम पढ़े-लिखे हैं, जिन्हें न्यायालय की प्रक्रिया तथा कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी नहीं है। ऐसे में प्रशासन को प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने और न्यायालय में अपील करने के लिए पर्याप्त अवसर देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि समिति यह स्वीकार करती है कि स्थानीय लोगों में कानूनी जागरूकता की कमी रही है, लेकिन प्रशासन को भी कार्रवाई से पहले मानवीय परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए था। एस. लाल के अनुसार, लोगों को सरकारी भूमि खाली करने के निर्देश तो दिए गए, लेकिन मकान ध्वस्त करने की निश्चित तारीख की पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने के कारण कई परिवार आवश्यक तैयारियां नहीं कर सके। उन्होंने मांग की कि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को कानूनी प्रक्रिया समझाने और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।

वन ग्रामों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने की मांग उठाते हुए एस. लाल ने बताया कि पूछड़ी सहित आसपास की कई बस्तियां वर्ष 1968 से बसी हुई हैं। उनके अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़ और नदियों में मकान बह जाने के कारण प्रभावित हुए कई परिवार दशकों पहले यहां आकर बसे थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय रामलाल विद्यार्थी ने इन परिवारों को बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि इन बस्तियों में रहने वाले लोग हाल के वर्षों में नहीं आए, बल्कि कई पीढ़ियों से यहां निवास कर रहे हैं।

महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से वन ग्रामों में निवास कर रहे परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों ने दशकों से इन क्षेत्रों में अपना जीवन बिताया है, उनके आवास और भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। बैठक में 24 वन ग्रामों, वन खत्तों और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा हुई।

एस. लाल ने स्पष्ट किया कि मालिकाना हक संघर्ष समिति प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि रामनगर क्षेत्र के सभी 24 वन ग्रामों और वन खत्तों के लोगों को एक मंच पर लाने के लिए जल्द सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन के माध्यम से सरकार के समक्ष भूमि स्वामित्व, मालिकाना हक, पुनर्वास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगें रखी जाएंगी। उन्होंने कहा कि समिति प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।

फिलहाल रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा गरमा गया है। महापंचायत में शामिल लोगों ने सरकार से तत्काल राहत देने और दशकों से वन ग्रामों में रह रहे लोगों के मालिकाना हक पर निर्णय लेने की मांग की है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री और वन विभाग को भेजे जाने वाले ज्ञापन तथा प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि बेघर हुए गरीब परिवारों को कब तक सुरक्षित आशियाना मिलेगा और लंबे समय से उठ रही वन ग्रामों के मालिकाना हक की मांग का समाधान कब होगा।