
स्थान – खटीमा (ऊधम सिंह नगर)
रिपोर्टर – अशोक सरकार

सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 57वीं वाहिनी ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों के युवाओं के लिए 15 दिवसीय मोबाइल रिपेयरिंग प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को तकनीकी कौशल प्रदान कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

एसएसबी की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। कार्यक्रम के तहत युवाओं को मोबाइल फोन की मरम्मत से जुड़ी तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को भविष्य में अपना रोजगार शुरू करने की दिशा में मदद मिल सकेगी।




कार्यक्रम के दौरान एसएसबी अधिकारी बीएस धवाट ने बताया कि सशस्त्र सीमा बल देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को हुनरमंद बनाना बेहद जरूरी है, ताकि वे रोजगार के लिए केवल सरकारी और निजी नौकरियों पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने कौशल के आधार पर स्वरोजगार भी शुरू कर सकें।


अधिकारी बीएस धवाट ने कहा कि सिविक एक्शन प्रोग्राम के माध्यम से एसएसबी सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें गलत रास्तों पर जाने से रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रशिक्षण का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।


एसएसबी अधिकारी ने कहा कि मोबाइल फोन आज लोगों की दैनिक जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोजगार का उपयोगी माध्यम बन सकता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवा अपने गांव या आसपास के बाजारों में मोबाइल मरम्मत का काम शुरू कर सकते हैं। इससे उन्हें अपने क्षेत्र में ही आजीविका कमाने के अवसर मिल सकते हैं।

उन्होंने बताया कि एसएसबी की ओर से सीमांत क्षेत्रों में पहले भी विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में महिलाओं और युवाओं को सिलाई सहित अन्य व्यावसायिक कौशल सिखाए गए हैं। इनका उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है।



पूर्व में आयोजित सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए अधिकारी बीएस धवाट ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली एक महिला आज अपनी सिलाई की दुकान संचालित कर रही है। वह इस कार्य के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि युवाओं और महिलाओं को सही प्रशिक्षण तथा अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे अपने कौशल के बल पर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।


एसएसबी अधिकारी ने स्थानीय लोगों से सशस्त्र सीमा बल के साथ सहयोग और समन्वय बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा में स्थानीय नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। एसएसबी और आम जनता के बीच बेहतर तालमेल से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों को भी प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सिविक एक्शन प्रोग्राम का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ विश्वास और सहयोग के संबंध स्थापित करना भी है। इस तरह के आयोजनों से युवाओं को नई दिशा मिलती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। एसएसबी का प्रयास है कि सीमांत क्षेत्र के अधिक से अधिक युवा और महिलाएं इन कार्यक्रमों से जुड़कर लाभान्वित हों।

सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मोबाइल रिपेयरिंग जैसे तकनीकी प्रशिक्षण से युवाओं को व्यावहारिक जानकारी मिलने के साथ स्वरोजगार शुरू करने का विकल्प भी मिल सकता है। इससे रोजगार की तलाश में अन्य शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम करने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल सशस्त्र सीमा बल की 57वीं वाहिनी द्वारा शुरू किया गया 15 दिवसीय मोबाइल रिपेयरिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम सीमांत क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी कौशल और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एसएसबी का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक चेतना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास जारी रहेगा। इस पहल से सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होने और स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

