खटीमा में जमीन और रास्ते को लेकर विवाद गहराया, कोर्ट के फैसले के बाद भी कब्जा नहीं मिलने का आरोप, तहसीलदार ने रुकवाया निर्माण कार्य

खटीमा में जमीन और रास्ते को लेकर विवाद गहराया, कोर्ट के फैसले के बाद भी कब्जा नहीं मिलने का आरोप, तहसीलदार ने रुकवाया निर्माण कार्य

स्थान : खटीमा (ऊधम सिंह नगर)
रिपोर्टर : अशोक सरकार

ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में जमीन के मालिकाना हक और रास्ते को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम भैंसिहा और विजय बस्ती से जुड़े इस मामले में कई पक्षों ने जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक ओर न्यायालय के फैसले के बावजूद जमीन पर कब्जा नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है, तो दूसरी ओर विजय बस्ती के लोगों ने वर्षों पुराने रास्ते को लेकर दबंगई और धमकाने के आरोप लगाए हैं। विवाद बढ़ने पर तहसीलदार वीरेंद्र सजवान ने मौके पर पहुंचकर विवादित भूमि पर चल रहा काम रुकवा दिया।

ग्राम भैंसिहा निवासी सईद अहमद ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े मामले में न्यायालय ने 4 अप्रैल 2025 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपनी जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। सईद अहमद का कहना है कि न्यायालय से राहत मिलने के बाद भी जमीन पर अधिकार प्राप्त करने के लिए उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से न्यायालय के आदेश के अनुसार कार्रवाई कर उन्हें जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की है।

वहीं, खटीमा की विजय बस्ती में पिछले करीब दस वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे 15 फीट चौड़े रास्ते को लेकर भी विवाद गहरा गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह रास्ता लंबे समय से लोगों के आवागमन के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। अब इसी रास्ते को लेकर विवाद खड़ा होने से बस्ती के लोगों की चिंता बढ़ गई है। निवासियों ने प्रशासन से रास्ते की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और सरकारी अभिलेखों के आधार पर पैमाइश कराने की मांग की है।

विजय बस्ती निवासी तस्लीम अहमद और सेजल ने आरोप लगाया कि रास्ते को लेकर कुछ लोगों की ओर से दबंगई की जा रही है और उन्हें धमकाया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस रास्ते का उपयोग बस्ती के लोग पिछले दस वर्षों से करते आ रहे हैं, उस पर विवाद उत्पन्न किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और रास्ते की पैमाइश कराकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई। साथ ही विवाद के निष्पक्ष समाधान की अपील की।

दूसरी ओर, चरनजीत सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए विवादित जमीन को अपनी पारिवारिक भूमिधरी संपत्ति बताया है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित जमीन पर उनके परिवार का मालिकाना अधिकार है। चरनजीत सिंह ने उल्टा कुछ लोगों पर उनकी धान की फसल काटने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोप सही नहीं हैं और पूरे मामले की जांच जमीन के वास्तविक अभिलेखों के आधार पर की जानी चाहिए।

इस विवाद में ओमप्रकाश निषाद बाबा ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2020 में उन्होंने एक करोड़ 52 लाख रुपये में जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। उन्होंने जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर कथित धोखाधड़ी और रास्ते पर अवैध कब्जे के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जमीन से संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्री की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। हालांकि, उनके दावों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जमीन और रास्ते को लेकर लगातार बढ़ते विवाद के बीच स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। मामले की जानकारी मिलने पर तहसीलदार वीरेंद्र सजवान मौके पर पहुंचे और विवादित भूमि पर चल रहे कार्य को रुकवा दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद फिलहाल मौके पर चल रहा काम बंद करा दिया गया है। जमीन के मालिकाना हक और रास्ते की वास्तविक स्थिति को लेकर संबंधित दस्तावेजों तथा राजस्व अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विवाद में अलग-अलग पक्षों की ओर से किए जा रहे दावों ने मामले को और उलझा दिया है। एक पक्ष न्यायालय के फैसले के आधार पर जमीन पर कब्जा मिलने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष जमीन को अपनी पैतृक भूमिधरी संपत्ति बता रहा है। वहीं, करोड़ों रुपये में रजिस्ट्री कराने का दावा और वर्षों पुराने रास्ते को लेकर लगाए गए आरोप भी कई सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे में विवादित जमीन का वास्तविक स्वामित्व, रजिस्ट्री की वैधता और रास्ते की कानूनी स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

फिलहाल खटीमा में जमीन और रास्ते से जुड़े इस विवाद को लेकर सभी पक्ष प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। विजय बस्ती के लोग दस वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते की पैमाइश कराने की मांग कर रहे हैं, जबकि जमीन पर अधिकार जताने वाले पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों और दावों के आधार पर कार्रवाई चाहते हैं। अब देखना होगा कि राजस्व अभिलेखों, न्यायालय के आदेश और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन क्या निर्णय लेता है। फिलहाल जमीन के वास्तविक मालिकाना हक और रास्ते के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।