
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

केंद्र और राज्य सरकार के ‘ड्रग्स फ्री’ संकल्प को साकार करने के लिए देहरादून में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने नशा मुक्ति अभियान को और तेज कर दिया है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक विशेष निगरानी और जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और नारकोटिक्स विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए संवेदनशील स्थानों की पहचान की जा रही है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है, जहां से मादक पदार्थों की आपूर्ति होने की आशंका है।




सीएमओ ने बताया कि नारकोटिक्स विभाग और पुलिस को सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने तथा रैंडम चेकिंग करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। नशे की तस्करी के संभावित रास्तों और संवेदनशील स्थानों की मैपिंग कर नियमित निगरानी की जा रही है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की पहचान करना और नशे के अवैध कारोबार को रोकना है।


नशा मुक्ति अभियान के तहत बड़े शिक्षण संस्थानों और उनके बोर्डिंग परिसरों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सीएमओ के अनुसार स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें शिक्षण संस्थानों में अचानक जांच कर रही हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में नशे की प्रवृत्ति की पहचान करने और उन्हें समय रहते इस समस्या से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।


डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि शिक्षण संस्थानों में जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ड्रग टेस्टिंग किट भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन किटों की सहायता से संदिग्ध मामलों में नशीले पदार्थों के सेवन की जांच की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाना और उन्हें स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की ओर प्रेरित करना है।

सीएमओ ने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान कोई छात्र ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसकी काउंसलिंग कराई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे विद्यार्थियों को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए आवश्यक परामर्श और सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही यह पता लगाने का भी प्रयास किया जाएगा कि संबंधित छात्र तक नशीले पदार्थ कहां से और किस माध्यम से पहुंच रहे हैं।



उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति अभियान में केवल जांच और कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जाए।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने के सरकारी संकल्प को मजबूती प्रदान करना है। सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई और युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय से नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में जाने से रोका जा सके।

