आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पांच महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप, यूकेडी ने सरकार और संचालन कंपनी पर उठाए गंभीर सवाल

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पांच महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप, यूकेडी ने सरकार और संचालन कंपनी पर उठाए गंभीर सवाल

स्थान : रुड़की (हरिद्वार)
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्थाओं को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यूकेडी अध्यक्ष दीपक लखवान ने आरोप लगाया कि रुड़की क्षेत्र में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों को पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं दिया गया है। इसके अलावा कई केंद्रों पर दवाओं की कमी और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की खराब स्थिति होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

यूकेडी अध्यक्ष दीपक लखवान ने बताया कि रुड़की क्षेत्र में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्होंने दो केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां कार्यरत चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों से बातचीत कर वेतन भुगतान और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली गई। लखवान के अनुसार, दोनों केंद्रों के कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

दीपक लखवान ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उद्देश्य आम जनता को उनके आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि इन केंद्रों में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कर्मचारियों का वेतन इतने लंबे समय से क्यों रोका गया है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

यूकेडी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि रुड़की सहित कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। इसके अलावा कुछ केंद्रों पर ब्लड प्रेशर जांचने वाली मशीनों के उपकरण भी खराब और फटी हुई हालत में मिले हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी चिकित्सा उपकरणों और जरूरी दवाओं का अभाव होना गंभीर विषय है। ऐसी स्थिति में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दीपक लखवान ने कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत कई कर्मचारियों को अब तक नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना नियुक्ति पत्र और आधिकारिक पहचान पत्र के कर्मचारियों से सेवाएं लेना रोजगार संबंधी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है। यूकेडी ने मांग की कि सभी कर्मचारियों को नियुक्ति संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं और उनके लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए।

यूकेडी अध्यक्ष ने दावा किया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन का कार्य करोड़ों रुपये में हल्द्वानी की बॉम्बे शिवा हेल्थ सर्विस नामक कंपनी को दिया गया था। उन्होंने कंपनी को दिए गए कार्य, अनुबंध की शर्तों और भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। लखवान ने सवाल उठाया कि जब स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन के लिए धनराशि निर्धारित की गई है, तो कर्मचारियों को वेतन और केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई जा रही हैं। हालांकि, कंपनी से जुड़े अनुबंध और भुगतान संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

दीपक लखवान ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने कहा कि यूकेडी को संदेह है कि संबंधित कंपनी के माध्यम से जनता के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की साजिश रची जा रही है। उन्होंने सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन पर खर्च की गई धनराशि का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। हालांकि, वित्तीय गड़बड़ी के इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

उत्तराखंड में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जुलाई और अगस्त 2026 में हल्द्वानी के आरोग्य मंदिरों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन बकाया होने की खबरें प्रकाशित हुई थीं। ऐसे मामलों में कर्मचारियों ने वेतन भुगतान में देरी के कारण आर्थिक परेशानियां होने की बात कही थी। हालांकि, रुड़की में लगाए गए ताजा आरोपों और पूर्व में सामने आए मामलों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, यूकेडी अध्यक्ष दीपक लखवान ने प्रदेश सरकार से मांग की कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों का पांच महीने का कथित बकाया वेतन तत्काल दिलाया जाए। साथ ही सभी केंद्रों पर आवश्यक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने संचालन कंपनी की भूमिका और सरकारी धनराशि के उपयोग की जांच कराने की भी मांग की। फिलहाल इस मामले में संबंधित कंपनी और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में कर्मचारियों की शिकायतों और यूकेडी के आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।