
स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

देशभर के साथ चंपावत जिले के लोहाघाट में भी महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वाल्मीकि समाज के लोगों ने विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। महर्षि वाल्मीकि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही और पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।

लोहाघाट में सरपंच हरचरण वाल्मीकि के दिशा-निर्देशन में महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह की विशेष तैयारियां की गई थीं। इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। मंदिर की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रही। समाज के लोगों ने मिलकर आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं और पूरे उत्साह के साथ जयंती समारोह में भाग लिया।



महर्षि वाल्मीकि जयंती को लेकर मंदिर परिसर में पिछली रात से ही भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने भगवान के भजनों और धार्मिक गीतों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि को याद किया। इस दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना कर समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई। धार्मिक कार्यक्रमों में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


समारोह के दौरान बच्चों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों ने महर्षि वाल्मीकि, भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं का रूप धारण कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। धार्मिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों की भागीदारी ने समारोह में विशेष उत्साह भर दिया और श्रद्धालुओं ने उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की।


इस अवसर पर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी संघ उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मनीष वाल्मीकि ने समस्त प्रदेशवासियों को महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लोहाघाट में समाज के लोगों ने बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई है। महर्षि वाल्मीकि मंदिर में भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।

मनीष वाल्मीकि ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके जीवन से प्रत्येक व्यक्ति को बुराइयों का त्याग कर अच्छाई और सदाचार के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं अब भी प्रासंगिक हैं और समाज को नैतिक मूल्यों, सद्भाव तथा अच्छे आचरण का संदेश देती हैं।



उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने अपने जीवन और रचनाओं के माध्यम से मानवता को सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में आपसी भाईचारे और सद्भाव की भावना को मजबूत किया जा सकता है।


जयंती समारोह में पर्यावरण मित्रों और उनके परिजनों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। समाज के लोगों ने एकजुट होकर धार्मिक कार्यक्रमों को सफल बनाने में सहयोग दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में एकता तथा आपसी सहयोग की भावना बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हुए।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर लोहाघाट में दिनभर धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा। मंदिर में आयोजित भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और बच्चों की धार्मिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया। इस दौरान सरपंच हरचरण वाल्मीकि, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मनीष वाल्मीकि सहित कई पर्यावरण मित्र, उनके परिजन और स्थानीय श्रद्धालु मौजूद रहे। समारोह का समापन महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों पर चलने और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा भाईचारा बनाए रखने के संदेश के साथ हुआ।

