गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग तेज, पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत अनशन पर बैठे

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग तेज, पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत अनशन पर बैठे

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट :

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में चल रहा आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। सोमवार को आंदोलन के नौवें दिन पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत भी अनशन पर बैठ गए। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार से राजधानी के मुद्दे पर जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की है।

पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच फुटबॉल बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बारी-बारी से सत्ता संभालने वाली पार्टियों ने राजधानी के सवाल को एक-दूसरे पर डालकर लगातार टालने का काम किया है। इसका खामियाजा पहाड़ की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब राजधानी के मुद्दे पर निर्णायक संघर्ष की आवश्यकता है।

हरीश रावत ने घोषणा की कि मंगलवार, 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में ‘जनता कैबिनेट’ की बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, मुख्य सचिव और विधानसभा सचिव की मौजूदगी की बात कही गई है। बैठक में उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने सहित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें पारित करने की पहल की जाएगी। हालांकि, संबंधित पदाधिकारियों की वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।

आंदोलनकारियों के अनुसार, ‘जनता कैबिनेट’ में गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव प्रमुखता से रखा जाएगा। प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजने की बात कही गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य राजधानी के सवाल पर जनता की भावनाओं को सामने लाना और सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने जिस पहाड़ी राज्य का सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजधानी का मुद्दा केवल प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि पहाड़ की पहचान और राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित कराने के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा, “प्रण से प्राण तक, संकल्प से लक्ष्य तक हम उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनवाने के लिए संघर्ष करते रहेंगे।” उन्होंने प्रदेश की जनता, सामाजिक संगठनों और राज्य आंदोलनकारियों से 27 अक्टूबर को बुद्ध पार्क में आयोजित होने वाली ‘जनता कैबिनेट’ की बैठक में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजधानी के मुद्दे पर व्यापक जनभागीदारी से आंदोलन को मजबूती मिलेगी।

वहीं, आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पंडित मोहन कांडपाल, जिलाध्यक्ष फौजी राजेंद्र कांडपाल और प्रेमा मेहरा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने लंबा संघर्ष किया और अनेक लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। राज्य आंदोलनकारियों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ के हितों और राज्य आंदोलन की मूल भावनाओं को लेकर एक बार फिर प्रदेश की जनता को एकजुट होने की आवश्यकता है।

आंदोलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन के पीछे पहाड़ी क्षेत्रों के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान की भावना प्रमुख रही है। ऐसे में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। आंदोलनकारियों ने कहा कि राजधानी को लेकर अब केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राजधानी के मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।

इस दौरान गोपाल दत्त कुमोड़ी, कार्तिक उपाध्याय, अंजू पांडेय, कविता जीना, देवेंद्र सालाकोटी, चतुर सिंह नेगी, आनंद सिंह कन्याल, कमलेश खंडूरी, मोहन चंद्र पाटनी, हेम चंद्र शर्मा, संजय बिष्ट, खीमेश पनेरू, नीमा भट्ट, रमा पांडेय और हरेंद्र बोरा सहित अन्य आंदोलनकारी मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, 27 अक्टूबर को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में प्रस्तावित ‘जनता कैबिनेट’ को लेकर आंदोलनकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं