
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा ने वर्ष 2022 के चुनाव में जीत से दूर रही 23 विधानसभा सीटों पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। पार्टी इन सीटों पर संगठनात्मक कमजोरियों की पहचान करने के साथ बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हालिया उत्तराखंड दौरे के दौरान भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर मंथन किया गया। हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की बैठकों में हारी हुई तथा कम अंतर वाली सीटों पर संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।



वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की कुल 70 सीटों में से 47 पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। अब भाजपा का संगठन अपनी 47 सीटों पर पकड़ बनाए रखने के साथ उन 23 सीटों पर भी अलग रणनीति बना रहा है, जहां पिछले चुनाव में उसे सफलता नहीं मिली थी।

भाजपा प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि पार्टी ने इन 23 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की चुनौती स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि चुनावी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बूथ है और बूथ स्तर का संगठन मजबूत होने पर ही पार्टी अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतार सकती है।



पार्टी की रणनीति के तहत वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को हारी हुई विधानसभा सीटों पर प्रवास की जिम्मेदारी दी जा रही है। इससे पहले पार्टी की कोर कमेटी के सदस्यों को भी इन क्षेत्रों में संगठनात्मक प्रवास कर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
दीप्ति रावत भारद्वाज के अनुसार प्रवास के दौरान नेता वर्तमान कार्यकर्ताओं के साथ उन पूर्व कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे, जो किसी कारण से संगठनात्मक गतिविधियों में कम सक्रिय हैं। पार्टी का प्रयास आपसी संवाद बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही संगठनात्मक समस्याओं को समझने का है।




भाजपा नेतृत्व बूथ समितियों की सक्रियता, स्थानीय मुद्दों, संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय तथा पिछले चुनाव में सामने आई कमजोरियों पर भी फीडबैक जुटा रहा है। पार्टी ने हारी हुई सीटों के लिए वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय कर सीटवार समीक्षा की व्यवस्था भी बनाई है।
प्रदेश महामंत्री ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य पुराने और वर्तमान कार्यकर्ताओं के बीच संवादहीनता को समाप्त कर सभी को एक मंच पर लाना है। उनका कहना है कि संगठन के सभी स्तरों पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल भाजपा का मिशन-2027 बूथ सशक्तीकरण और हारी हुई सीटों पर संगठनात्मक प्रवास पर केंद्रित है। चुनाव में प्रत्याशी चयन और अंतिम रणनीति बाद के चरणों में तय होगी, जबकि वर्तमान अभियान में पार्टी स्थानीय संगठन की स्थिति और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैक पर ध्यान दे रही है।

