
स्थान : थराली/ चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट


नंदा देवी की धार्मिक यात्रा के चेपड़ो गांव पहुंचने पर देवी भक्तों ने भव्य स्वागत किया। चेपड़ो सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा के स्वागत के लिए पहुंचे। इस दौरान पूरे क्षेत्र में मां नंदा के जयकारे गूंजते रहे।


चेपड़ो में यात्रा के रात्रि प्रवास के दौरान नंदा जागरण और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां नंदा की आराधना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक अनुष्ठानों में स्थानीय ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।



शनिवार को यात्रा विकासखंड थराली से निकलकर विकासखंड देवाल के कोठी गांव पहुंचेगी, जहां दोपहर के भोजन का कार्यक्रम निर्धारित है। हालांकि कोठी गांव के बाद बधाण की नंदा देवी की डोली किस मार्ग से आगे बढ़ेगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।



केंद्रीय लोकजात समिति देवराड़ा-थराली की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक कोठी से देव डोली देवाल विकासखंड के धरा तल्ला गांव पहुंचेगी और वहीं रात्रि प्रवास करेगी। समिति ने अपने निर्धारित यात्रा कार्यक्रम में इसी मार्ग का उल्लेख किया है।


वहीं बड़ीजात समिति कुरूड़ की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार यात्रा कोठी से आगे बढ़कर नंदा धाम नंदकेसरी पहुंचेगी और वहीं रात्रि प्रवास प्रस्तावित है। दोनों समितियों के अलग-अलग कार्यक्रम सामने आने के कारण यात्रा के अगले पड़ाव को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस बना हुआ है।

ऐसे में बधाण की नंदा देवी की डोली आखिर किस मार्ग से आगे बढ़ेगी, यह यात्रा के कोठी पहुंचने के बाद ही स्पष्ट होने की संभावना है। यात्रा मार्ग को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े लोगों की निगाहें अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।



नंदा देवी राजराजेश्वरी मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने एक बार फिर कहा कि बधाण की नंदा देवी इस बार लोकजात यात्रा पर निकली हैं। उनके मुताबिक यदि यह बड़ी जात अथवा श्री नंदा देवी राजजात यात्रा होती तो अमावस्या की रात्रि में कुलसारी स्थित दक्षिण कालिंका मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया जाता।


नरेश गौड़ के अनुसार बड़ी जात के दौरान सूना गांव के सामने पिंडर नदी के पार कुलसारी में भूमिगत श्री यंत्र को बाहर निकालकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसी प्रक्रिया प्रस्तावित नहीं होने से यह स्पष्ट है कि बधाण की नंदा देवी की यात्रा लोकजात के रूप में ही आगे बढ़ेगी।

