
स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट


जनपद के सीमांत क्षेत्रों में वन्यजीवों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर क्षेत्र में भालू की गतिविधियों के बाद अब दूरस्थ गांव भी भालू के आतंक से जूझ रहे हैं। सोमवार को ज्योतिर्मठ प्रखंड के दूरस्थ कलगोठ गांव में भालू ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।


भालू के हमले की घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों में वन्यजीवों की लगातार बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोग अब घरों से बाहर निकलने और खेतों-जंगलों की ओर जाने में भी डर महसूस कर रहे हैं।



ग्राम प्रधान सहदेव सिंह ने बताया कि भालू के हमले में व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में सुरक्षा के तत्काल इंतजाम करने की मांग की है।



ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भालू और गुलदार की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। आए दिन जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास दिखाई देने से ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा है।


वन्यजीवों के बढ़ते खतरे का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांवों में कई लोगों को रोजाना खेतों, जंगलों और दूरस्थ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन जंगली जानवरों के डर से अब अकेले निकलना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के लिए चारा और लकड़ी लाने के साथ ही खेती से जुड़े कामों के लिए जंगल और खेतों की ओर जाना उनकी मजबूरी है। ऐसे में भालू और गुलदार की मौजूदगी के कारण रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।



घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां नियमित रूप से वनकर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाने और वन्यजीवों को आबादी से दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि समय रहते ठोस उपाय नहीं किए गए तो किसी बड़ी घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कलगोठ गांव में हुई इस घटना ने सीमांत क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है। लगातार हो रही वन्यजीव गतिविधियों के बीच अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भय के माहौल को कम किया जा सके।

