चित्रेश्वर धाम अतिक्रमण विवाद पर गरमाई सियासत, कत्यूरी समाज ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

चित्रेश्वर धाम अतिक्रमण विवाद पर गरमाई सियासत, कत्यूरी समाज ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

हल्द्वानी के रानीबाग स्थित प्रसिद्ध चित्रेश्वर धाम में कथित अतिक्रमण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को लेकर पहाड़ी कत्यूरी समाज ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए शासन और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कत्यूरी समाज के पदाधिकारियों ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर प्रशासन से धाम क्षेत्र से तत्काल अवैध अतिक्रमण हटाने और इस मामले में शामिल नामजद लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने प्रशासनिक रवैये पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समय रहते चित्रेश्वर महादेव परिसर से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो इस आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में पूरे उत्तराखंड में ‘देवस्थान अतिक्रमण हटाओ अभियान’ की शुरुआत की जाएगी, ताकि धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बचाया जा सके।

पहाड़ी आर्मी के संस्थापक ने दावा किया कि धाम परिसर में हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण से जुड़े सभी पुख्ता दस्तावेज व प्रमाण उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

पत्रकार वार्ता में मौजूद कत्यूरी समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी चंदन सिंह मनराल और राजेंद्र सिंह ने धाम के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चित्रेश्वर महादेव और जिया रानी धाम केवल सामान्य स्थान नहीं हैं, बल्कि यह संपूर्ण कुमाऊं और पहाड़ के लोगों की अटूट आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। सदियों से इन स्थानों पर स्थानीय लोक देवताओं के रूप में पूजा-अर्चना की जाती रही है और इस पूरे क्षेत्र से लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

कत्यूरी समाज के नेताओं ने कहा कि आस्था के इन केंद्रों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व धार्मिक स्थलों की भूमि पर कब्जा कर वहां का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि अपनी धार्मिक धरोहरों और लोक संस्कृति की रक्षा के लिए वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

पत्रकार वार्ता के दौरान कत्यूरी समाज के प्रतिनिधि मनोहर सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था और भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल दागते हुए कहा कि आखिरकार धाम परिसर के भीतर शनि मंदिर निर्माण के लिए जमीन किसने और किस आधार पर उपलब्ध कराई? उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद रानीबाग और आसपास के क्षेत्रों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के बीच भी अतिक्रमण के इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि पवित्र देवस्थानों की भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण हमारी पौराणिक संस्कृति और परंपराओं पर सीधा प्रहार है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।

बहरहाल, कत्यूरी समाज और पहाड़ी आर्मी के सख्त रुख को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। आगामी दिनों में अनशन और आंदोलन की दी गई चेतावनी के मद्देनजर क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कत्यूरी समाज की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और अतिक्रमण हटाओ अभियान पर क्या कार्रवाई की जाती है।