पिरुल से राखियां बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं पौड़ी की महिलाएं, 27 स्टॉलों से हुई 3 लाख से अधिक की बिक्री

पिरुल से राखियां बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं पौड़ी की महिलाएं, 27 स्टॉलों से हुई 3 लाख से अधिक की बिक्री

स्थान : पौड़ी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के जंगलों से निकलने वाला पिरुल अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का जरिया बन रहा है। पौड़ी जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पिरुल का उपयोग कर आकर्षक राखियां और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर रही हैं।

रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर जिले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की ओर से 27 स्थानों पर विशेष स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों पर पिरुल से तैयार की गई आकर्षक राखियां लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

राखियों के साथ ही स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा तैयार किए गए अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इन उत्पादों के जरिए महिलाएं अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाने के साथ-साथ अच्छी आय भी अर्जित कर रही हैं।

इन स्टॉलों पर स्थानीय लोगों के साथ अन्य खरीदारों की भी अच्छी रुचि देखने को मिल रही है। लोग बाजार में उपलब्ध पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों के बजाय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखियों और अन्य सामानों की खरीदारी कर रहे हैं।

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि इन स्टॉलों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की सही कीमत मिलने के साथ उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि पिरुल जैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर तैयार किए जा रहे उत्पाद पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित हो रहे हैं। जंगलों में गिरे पिरुल का उपयोग होने से जहां इसकी उपयोगिता बढ़ रही है, वहीं ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का नया अवसर भी तैयार हो रहा है।

रक्षाबंधन के अवसर पर लगाए गए स्टॉलों से महिलाओं के हुनर को नया बाजार मिला है। पिरुल से बनी राखियों की बिक्री के जरिए महिलाएं सीधे आर्थिक लाभ कमा रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, इन स्टॉलों के माध्यम से अब तक 3 लाख रुपये से अधिक की बिक्री हो चुकी है। बिक्री का यह आंकड़ा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

पिरुल से राखियां और अन्य उत्पाद तैयार कर पौड़ी की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। स्थानीय संसाधन, महिलाओं का हुनर और बाजार की उपलब्धता मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।