खानपुर CHC की बदहाल व्यवस्था पर सवाल, आठ पद स्वीकृत फिर भी महज दो डॉक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं

खानपुर CHC की बदहाल व्यवस्था पर सवाल, आठ पद स्वीकृत फिर भी महज दो डॉक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं

स्थान : लक्सर
ब्यूरो रिपोर्ट

खानपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाखों की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करता है, लेकिन अस्पताल की जमीनी तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अस्पताल खुलने के निर्धारित समय के बाद भी कार्यालयों पर ताले लटके नजर आए, जबकि कई डॉक्टरों की कुर्सियां भी खाली दिखाई दीं।

अस्पताल के निर्धारित समय के अनुसार सुबह आठ बजे ओपीडी और स्वास्थ्य सेवाएं शुरू होनी चाहिए, लेकिन करीब साढ़े आठ बजे तक अस्पताल के कुछ कार्यालयों पर ताले लगे हुए दिखाई दिए। मीडिया कैमरा पहुंचने के बाद आनन-फानन में एक कर्मचारी ने हथौड़े की मदद से ताला तोड़कर कार्यालय खोलने का प्रयास किया।

अस्पताल में सुबह के समय मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते रहे, लेकिन कार्यालयों पर ताले और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल खुलने का समय सुबह आठ बजे निर्धारित है, तो साढ़े आठ बजे तक कार्यालय बंद क्यों थे।

अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के कार्यालयों का जायजा लेने पर कई कुर्सियां खाली नजर आईं। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में समय पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से उन्हें इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।

खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आठ डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने की बात सामने आ रही है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं महज दो डॉक्टरों के भरोसे संचालित होने का दावा किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

मरीजों की ओर से अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। जरूरी दवाएं नहीं मिलने पर मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। निजी उपचार का खर्च गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।

गर्भवती महिलाओं के लिए भी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है।

डॉक्टरों की कमी और अस्पताल में समय पर चिकित्सकों के नहीं पहुंचने को लेकर अस्पताल में तैनात डॉ. जॉर्ज सैमुअल से सवाल किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ डॉक्टर दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं, जिसके चलते अस्पताल पहुंचने में देरी होती है। उनका यह जवाब भी अस्पताल की व्यवस्थाओं और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल में आठ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं तो मरीजों को पर्याप्त डॉक्टर कब मिलेंगे। क्या स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी कर रहा है और मरीजों को समय पर डॉक्टर, दवाएं और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं कब तक उपलब्ध हो पाएंगी। इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।