स्थान : चमोली
रिपोर्टर : विनोद पांडे


टनल में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चलाया गया चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान लगभग 117 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा। अभियान के दौरान कुल 12 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाला गया, जबकि 10 श्रमिकों की दुखद मृत्यु हो गई।


रेस्क्यू अभियान के पहले दिन टनल से कुल 19 श्रमिकों को बाहर निकाला गया। इनमें 12 घायल श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर उपचार के लिए भेजा गया, जबकि सात श्रमिकों के शव भी बरामद किए गए।



अभियान के दौरान रेस्क्यू टीमों ने टनल के भीतर लगातार सर्च अभियान चलाया। पानी और मलबे के बीच संभावित स्थानों पर लापता श्रमिकों की तलाश की गई और उन्हें बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए।

15 अगस्त को रेस्क्यू टीम को एक और श्रमिक का शव बरामद करने में सफलता मिली। इसके बाद भी टनल के अंदर दो श्रमिकों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए सघन तलाशी अभियान जारी रखा गया।

रेस्क्यू अभियान के अंतिम चरण में 18 अगस्त को शेष दो लापता श्रमिकों को भी टनल से बाहर निकाला गया। इसके साथ ही कई दिनों से चल रहा रेस्क्यू अभियान अपने अंतिम चरण तक पहुंचा।


अभियान के दौरान टनल के भीतर जमा पानी सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल रहा। पानी की निकासी के लिए सक्शन पंप सहित आवश्यक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, जिससे टनल के अंदरूनी और दुर्गम हिस्सों तक रेस्क्यू टीमों की पहुंच आसान हो सकी।



इसके साथ ही टनल में जमा मलबे को हटाने और फंसी हुई मशीनरी को बाहर निकालने का काम भी लगातार किया गया। रेस्क्यू टीमों ने प्रत्येक संभावित स्थान की बारीकी से सर्चिंग करते हुए लापता श्रमिकों तक पहुंचने का प्रयास किया।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल किया। दिन-रात लगातार चले अभियान में अलग-अलग एजेंसियों की टीमें समन्वय के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी रहीं।


अभियान में फायर सर्विस, जिला पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी जोशीमठ, आईटीबीपी गौचर, सेना जोशीमठ, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, जिला प्रशासन और टीएचडीसी समेत संबंधित विभागों एवं एजेंसियों की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे और बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद सभी लापता श्रमिकों को टनल से बाहर निकाल लिया गया।

