स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट


विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज किए जाने को लेकर हरिद्वार में राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनुपमा रावत ने ऐसे लोगों के साथ प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकार वार्ता की, जो लंबे समय से क्षेत्र में निवास कर रहे हैं, लेकिन उनके नाम पर SIR प्रक्रिया के दौरान आपत्तियां दर्ज की गई हैं।


विधायक अनुपमा रावत का दावा है कि हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में एक हजार से अधिक लोगों के नाम पर आपत्ति दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इनमें कई ऐसे मतदाता शामिल हैं, जो लंबे समय से क्षेत्र में रह रहे हैं और मतदान भी करते आए हैं।


अनुपमा रावत ने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थानांतरित दर्शाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मतदाताओं को दस्तावेजों में मृत तक दर्शाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।


विधायक ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए वर्ग विशेष के मतदाताओं के वोट काटने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक के साथ कई ऐसे लोग भी मौजूद रहे, जिनके नाम पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे लंबे समय से हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और उनके नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए।


विधायक अनुपमा रावत ने बताया कि मामले को लेकर उन्होंने सोमवार को समर्थकों के साथ संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम पर दर्ज आपत्तियों की जांच कराने और गलत तरीके से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है।




उन्होंने बताया कि इस मामले में चुनाव आयोग को भी पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई गई है। विधायक ने आयोग से SIR प्रक्रिया के दौरान दर्ज आपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराने और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग की है।
अनुपमा रावत ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित जांच और प्रक्रिया के हटाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर वह आगे भी अधिकारियों और चुनाव आयोग के समक्ष आवाज उठाती रहेंगी।


