
स्थान : रूड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड सरकार द्वारा चौधरी राजेंद्र सिंह को उत्तराखंड राज्य किसान आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में उत्साह है। राज्य सरकार ने हाल ही में उन्हें किसान आयोग की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले भी वह किसान आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं।

शनिवार सुबह रुड़की के जादूगर रोड स्थित उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में समर्थक, किसान और स्थानीय लोग उनके आवास पहुंचे और फूल-मालाएं पहनाकर नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं।


इस दौरान समर्थकों ने चौधरी राजेंद्र सिंह की नियुक्ति पर खुशी जताई। उनके आवास पर सुबह से ही लोगों की आवाजाही बनी रही और समर्थकों ने उम्मीद जताई कि किसान आयोग के माध्यम से प्रदेश के किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।


चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि वह स्वयं किसान परिवार से जुड़े हैं और किसानों की समस्याओं तथा उनके सामने आने वाली चुनौतियों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि नई जिम्मेदारी के तहत उनकी प्राथमिकता किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करना होगी।



उन्होंने कहा कि किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी विभागों और शासन स्तर पर सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा। किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी इच्छा है कि उत्तराखंड का किसान आर्थिक रूप से मजबूत और खुशहाल बने। इसके लिए किसानों की समस्याओं को सुनने के साथ उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को भी सरकार के समक्ष रखा जाएगा।



उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में खेती से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान होना जरूरी है। आयोग के माध्यम से किसानों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

चौधरी राजेंद्र सिंह पूर्व में हरिद्वार जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। किसान आयोग में यह उनका दूसरा कार्यकाल है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार किसान आयोग के अध्यक्ष का पद करीब तीन वर्षों से रिक्त था।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद राजेंद्र सिंह ने किसानों के हित में पूरी गंभीरता से काम करने की बात कही है। वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि किसान आयोग में उनके पूर्व अनुभव का लाभ प्रदेश के किसानों को मिल सकता है।

