
स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

यूजीसी की प्रस्तावित नीतियों के विरोध में स्वर्ण समाज संघ ने शुक्रवार को रुड़की में प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में संगठन से जुड़े लोग शताब्दी द्वार पर एकत्र हुए और वहां से जुलूस निकालते हुए रोडवेज के रास्ते कचहरी पहुंचे।

प्रदर्शनकारियों ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर, सामाजिक न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में सभी वर्गों के हितों और चिंताओं पर विचार किया जाना चाहिए।


शताब्दी द्वार से शुरू हुआ जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील परिसर पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी से जुड़ी प्रस्तावित नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।


तहसील परिसर में कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाल मुंडवाकर विरोध जताया। इसके बाद स्वर्ण समाज संघ के प्रतिनिधियों ने नायब तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और प्रस्तावित नीतियों पर पुनर्विचार की मांग की।


ज्ञापन में कहा गया कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर, पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और समावेशिता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संगठन ने आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और सहायता बढ़ाने की मांग भी रखी।

संघ ने मांग की कि शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण नीतियों को लागू करने से पहले व्यापक जनपरामर्श कराया जाए। साथ ही नीतियों के सामाजिक और शैक्षिक प्रभावों का सार्वजनिक मूल्यांकन कराने तथा व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श की व्यवस्था करने की मांग भी की गई।




प्रदर्शन को राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी ने भी समर्थन दिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेर सिंह राणा भी प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने शिक्षा नीति से जुड़े फैसलों में सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखने की बात कही।
शेर सिंह राणा ने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की राय के बाद किए जाने चाहिए। उन्होंने यूजीसी की प्रस्तावित नीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई।

स्वर्ण समाज संघ ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन के जरिए यूजीसी की प्रस्तावित नीतियों पर पुनर्विचार करने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख मांग है।

