
स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : संजय जोशी

कुमाऊँ मंडल में दाखिल-खारिज और विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों की जांच प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए मंडलायुक्त दीपक रावत ने सभी जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे सभी मामलों में लेखपाल और पटवारी मौके पर जाकर अनिवार्य रूप से स्थलीय सत्यापन करें, जिनमें आवेदक की वास्तविक स्थिति, निवास, आय, परिवार या भूमि से जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी हो।

मंडलायुक्त ने कहा कि विभिन्न माध्यमों से ऐसी सूचनाएं सामने आई हैं कि कुछ मामलों में लेखपाल या पटवारी बिना मौके पर गए ही दाखिल-खारिज और जाति, स्थायी निवास, आय तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि बिना समुचित स्थलीय सत्यापन के रिपोर्ट देने से गलत दाखिल-खारिज की आशंका बढ़ जाती है। इससे भूमि संबंधी विवाद और अनियमितताएं भी पैदा हो सकती हैं। इसी तरह प्रमाण पत्रों में उचित जांच नहीं होने से अपात्र व्यक्तियों को लाभ मिलने अथवा फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की संभावना भी बनी रहती है।

मंडलायुक्त ने बताया कि ऊधमसिंह नगर जनपद में इस तरह के कुछ प्रकरण संज्ञान में आए हैं। इसके बाद पूरे कुमाऊँ मंडल में सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके।


सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दाखिल-खारिज और ऐसे सभी प्रमाण पत्रों के मामलों में, जहां भौतिक सत्यापन आवश्यक है, संबंधित लेखपाल या पटवारी अनिवार्य रूप से मौके पर पहुंचकर तथ्यों की जांच करें। बिना मौके का सत्यापन किए रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाए।
स्थलीय सत्यापन को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा। मंडलायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि सत्यापन के समय संबंधित कर्मचारी मौके से फोटो लें और उन्हें संबंधित पत्रावली अथवा ऑनलाइन आवेदन के साथ जोड़ा जाए। तस्वीर में स्थल की पहचान स्पष्ट होने के साथ तारीख और समय की जानकारी भी उपलब्ध होनी चाहिए।



भविष्य में इस प्रक्रिया को और तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। मंडलायुक्त ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें स्थलीय निरीक्षण के दौरान जीपीएस, जियो-कोऑर्डिनेट या अन्य तकनीकी माध्यमों से कर्मचारी की वास्तविक लोकेशन का सत्यापन किया जा सके।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सत्यापन करने वाला अधिकारी या कर्मचारी वास्तव में मौके पर पहुंचा था। डिजिटल प्रमाण उपलब्ध होने से जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और फर्जी अथवा गलत रिपोर्ट तैयार किए जाने की संभावना भी कम होगी।
मंडलायुक्त ने जिलाधिकारियों से कहा है कि संबंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराया जाए। साथ ही राजस्व अधिकारियों से समय-समय पर पर्यवेक्षण और आकस्मिक जांच भी कराई जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

