ब्यूरो रिपोर्ट

महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए आंदोलनकारी डॉक्टरों को फटकार लगाई और कहा कि यदि डॉक्टर काम पर नहीं लौटते हैं तो उनका वेतन भी रोक दिया जाना चाहिए।


सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर किसी नगर निगम अस्पताल में इलाज के अभाव में किसी मरीज की मौत होती है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने टिप्पणी की, “काम बंद कर दिया है तो वेतन लेना भी बंद कर दीजिए।” कोर्ट ने डॉक्टरों को तत्काल हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का निर्देश दिया।



दरअसल, महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने 5 अगस्त से राज्य सरकार के उस निर्णय के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है, जिसमें होम्योपैथी चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के तहत पंजीकरण कराने और निर्धारित शर्तों के तहत एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि केवल एक प्रस्तावित ब्रिज कोर्स के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथी चिकित्सा का अधिकार देना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि एलोपैथिक चिकित्सक बनने के लिए अभ्यर्थियों को NEET जैसी निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, इसलिए चिकित्सा मानकों से समझौता नहीं होना चाहिए।
MARD ने मांग की है कि अदालत का अंतिम निर्णय आने तक BHMS-CCMP पंजीकरण प्रक्रिया को तत्काल स्थगित किया जाए। संगठन ने रेजिडेंट डॉक्टरों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों के समाधान की भी मांग उठाई है। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं निकला।

हड़ताल के चलते फिलहाल ओपीडी सेवाएं, नियमित ड्यूटी, वैकल्पिक (इलेक्टिव) सर्जरी और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हैं, जबकि आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रखी गई हैं। हालांकि डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक समाधान नहीं निकला तो आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।


इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (महाराष्ट्र), MARD और राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

